
Rajasthan Police Operation Countdown in Delhi - AI PIC
राजस्थान के डीग जिले की पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान "ऑपरेशन काउंटडाउन" के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के कुशल निर्देशन में पुलिस टीम ने दिल्ली के उत्तम नगर स्थित एक तीन मंजिला इमारत में चल रहे हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर पर अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान राजस्थान पुलिस ने 31 युवकों और 33 युवतियों समेत कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को रेस्क्यू कराया है।
यह गिरोह खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी बताकर राजस्थान के लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहा था।पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस, येस और एचडीएफसी बैंक के फर्जी आईडी कार्ड और भारी मात्रा में आम जनता का गोपनीय बैंकिंग डेटा जब्त किया है।
ऐसे शुरू हुआ पुलिस का 'ऑपरेशन काउंटडाउन'
इस पूरे अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब एक्सिस बैंक डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर क्राइम थाना डीग में एक शिकायत दर्ज कराई। बैंक प्रबंधक ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग बैंक का नाम, लोगो और साख का गलत इस्तेमाल करके फर्जी वेबसाइटों के जरिए ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं।
जांच में सामने आया कि ठग खुद को बैंक का सीनियर अफसर बताकर लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने या कार्ड रिन्यू करने का झांसा देते थे। बात-बात में ग्राहक से उनका ओटीपी, सीवीवी, पैन कार्ड डिटेल्स, जन्मतिथि और जीमेल आईडी हासिल कर ली जाती थी और फिर मिनटों में बैंक खाता खाली कर दिया जाता था।
3 मंजिला इमारत में साइबर ठगी का अड्डा
डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस की जांच आजमगढ़ (यूपी) निवासी आकाश तक पहुंची। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक तीन मंजिला मकान किराए पर लेकर अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा है, जहां से केवल राजस्थान के मोबाइल नंबरों पर टारगेटेड कॉल्स की जाती थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कामां दिनेश यादव के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम बनाई गई। टीम ने गुप्त तरीके से दिल्ली में छापेमारी की, जहां 85 लोग काम करते हुए पाए गए। गहन पूछताछ के बाद 64 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और 19 लोगों को हिदायत देकर उनके परिजनों के साथ भेजा गया।
नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं को फंसाया
पुलिस जांच में इस गिरोह का सबसे खतरनाक और मानवीय पहलू यह सामने आया कि यह सिंडिकेट 'वर्क इंडिया' जैसे लोकप्रिय जॉब पोर्टल्स से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे निकालता था। इसके बाद इन युवाओं को 11,000 से 15,000 रुपये महीने की नौकरी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया जाता था। कॉल सेंटर के अंदर बाकायदा इंटरव्यू, ट्रेनिंग, टीम लीडर और कर्मचारियों की पूरी व्यवस्था बनाई गई थी। युवाओं को रोजाना ज्यादा से ज्यादा लोगों को ठगने पर अतिरिक्त इंसेंटिव और कमीशन दिया जाता था। हद तो तब हो गई जब गिरोह ने 18 साल से कम उम्र के 2 नाबालिगों को भी इस अपराध का हिस्सा बना लिया।
फर्जी सिम और करोड़ों का लेनदेन
पुलिस की तलाशी में मौके से कई पन्नों की ऐसी स्क्रिप्ट्स बरामद हुई हैं, जिन्हें पढ़कर टेलीकॉलर्स ग्राहकों से बात करते थे। इस स्क्रिप्ट में हर उस सवाल का जवाब पहले से लिखा होता था जो एक आम ग्राहक पूछ सकता था, ताकि ग्राहक को जरा भी शक न हो।
पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह एक ही फर्जी आईडी पर दर्जनों सिम कार्ड चला रहा था और अब तक करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन कर चुका है। साइबर क्राइम थाना डीग के पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र पाल इस पूरे मामले की आगे की विस्तृत कानूनी जांच कर रहे हैं।
Updated on:
01 Sept 2026 09:24 am
Published on:
01 Sept 2026 09:24 am
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