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राजस्थान नगर निकाय चुनाव: कहीं ननद-भाभी आमने-सामने तो कहीं मां-बेटे और दो बहनों की दावेदारी, चर्चा में मुकाबला

भरतपुर नगर निगम चुनाव में नामांकन के दूसरे दिन पारिवारिक रिश्तों ने चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया। वार्ड 61 में ननद-भाभी आमने-सामने हैं, जबकि वार्ड 10 में मां-बेटे और वार्ड 9 में दो बहनों ने पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।
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Bharatpur municipal elections

Bharatpur Nagar Nikay Chunav 2026: (Photo-Patrika)

Bharatpur Nagar Nikay Chunav 2026: भरतपुर। नगर निकाय चुनाव में टिकट की तस्वीर साफ होने से पहले ही दावेदारों ने अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया है। शनिवार को नामांकन के दूसरे दिन कलक्ट्रेट परिसर चुनाव अखाड़े में तब्दील नजर आया। किसी प्रत्याशी के साथ गाड़ियों का काफिला पहुंचा तो कई ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच समर्थकों के हुजूम के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचा।

पारिवारिक रिश्तों चुनावी मुकाबले को बनाया रोचक

इस बीच, नगर निगम चुनाव के नामांकन के दूसरे दिन कुछ वार्डों में पारिवारिक रिश्तों ने भी चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया। वार्ड 61 में ननद प्रिया सिंह पुत्री कुमर जैन और उसकी भाभी नीरज पत्नी सोनवीर चाहर ने पार्षद प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। इस वार्ड में एक ही परिवार की दो महिलाओं के आमने-सामने आने से मुकाबला चर्चा में है। इसी तरह वार्ड 10 में भूरी देवी और पुत्र पवन कुमार ने नामांकन दाखिल किया। वहीं वार्ड 9 से दो बहनों हेमलता पत्नी गिरेन्द्र पाल और कोमल पत्नी बृजेश कुमार ने भी पार्षद पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया।

टिकट की सूची का इंतजार

नामांकन दाखिल करने के बावजूद दावेदारों की नजर अब राजनीतिक दलों की टिकट सूची पर टिकी हुई है। कई दावेदारों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है, लेकिन अभी तक पार्टी की अंतिम सूची जारी नहीं हुई है। सूची जारी होने के बाद 31 अगस्त को पार्टी के सिंबल के साथ नामांकन दाखिल करने का मौका मिलेगा। यही वजह है कि शनिवार को नामांकन दाखिल करने वाले कई दावेदारों ने राजनीतिक रास्ते खुले रखे हैं। यदि किसी दावेदार को पार्टी का टिकट नहीं मिलता है तो वह 31 अगस्त को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर सकता है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में समीकरण बदलने की संभावना है।

टिकट कटने पर बगावत की भी आशंका

भाजपा और कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार है। ऐसे में टिकट की घोषणा के बाद कुछ दावेदारों को निराशा हाथ लगना तय माना जा रहा है। पार्टी का टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर सकते है तो कुछ कार्यकर्ताओं की से विरोध के स्वर भी उठने की आशंका है।