जयपुर

जयपुर में रेलवे की बूट लॉन्ड्री में सांसों की कीमत पर धुलते कंबल- बेडशीट्स, आमजन का घुटता दम

North Western Railway boot Laundry: सफर के दौरान रेलयात्रियों को साफ सुथरे कंबल- बेडशीट और तौलिए रेलवे प्रशासन उपलब्ध कराता है। दिखने में यह सामग्री साफ स्वच्छ नजर आती है लेकिन इसके पीछे जयपुर शहर के आमजन की घुटन और तकलीफें रेलवे प्रशासन नजर अंदाज कर रहा है। मामला जयपुर में करतारपुरा स्थित रेलवे की बूट लॉन्ड्री से जुड़ा है।
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Jan 27, 2026
रेलवे की बूट लॉन्ड्री बढ़ा रही प्रदूषण, पत्रिका फाइल फोटो
रेलवे की बूट लॉन्ड्री बढ़ा रही प्रदूषण, पत्रिका फाइल फोटो

North Western Railway boot Laundry: सफर के दौरान रेलयात्रियों को साफ सुथरे कंबल- बेडशीट और तौलिए रेलवे प्रशासन उपलब्ध कराता है। दिखने में यह सामग्री साफ स्वच्छ नजर आती है लेकिन इसके पीछे जयपुर शहर के आमजन की घुटन और तकलीफें रेलवे प्रशासन नजर अंदाज कर रहा है। मामला जयपुर में करतारपुरा स्थित रेलवे की बूट लॉन्ड्री से जुड़ा है।

बूट लॉन्ड्री में रोजाना हजारों की तादाद में गंदे कंबल, बैडशीट आदि की धुलाई होती है। इस दौरान सैंकड़ों क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल बॉयलर में होता है। वहीं बॉयलर की चिमनियों से रोजाना निकलता जहरीला धुंआ क्षेत्र की आवासीय कॉलोनियों में रहने वालों के लिए अब धीमा जहर साबित होने लगा है।

हवा में घुल रहा जहर

स्थानीय निवासी परम प्रकाश शर्मा के अनुसार लॉन्ड्री की ​चिमनियों से निकलते जहरील धुंए से लोग परेशान हैं। सांस के रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। घरों की छतों पर धुंए की कालिख जम रही है तो घुटन के कारण छतों पर बैठना भी मुश्किल हो रहा है। रेलवे प्रशासन को इस बारे में अवगत भी कराया लेकिन उसके बाद से लेकर अब तक रेलवे ने लॉन्ड्री को बंद करने या यहां से ट्रांसफर करने की बजाय उसका एक्सटेंशन कर दिया है। लॉन्ड्री के नजदीक सरकारी प्राथमिक स्कूल भी संचालित होता है और कारण बच्चों की सेहत पर धुंए का दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

बूट लॉन्ड्री के लिए नियम दरकिनार

उत्तर पश्चिम रेलवे प्रशासन ने करीब 7 साल पहले जयपुर के करतारपुरा नाले के पास बूट लॉन्ड्री स्थापित की। रेलवे ने लॉन्ड्री संचालन का ठेके पर दे दिया। करतारपुरा नाले के एक तरफ बूट लॉन्ड्री संचालित है तो दूसरी तरफ सुदर्शनपुरा औद्योगिक क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। नियामनुसार आवासीय क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां संचालित करने पर प्रशासन की रोक है बावजूद इसके करतापुरा नाले के पास आवासीय क्षेत्र में रेलवे प्रशासन धड़ल्ले से बूट लॉन्ड्री का संचालन कर रहा है। लॉन्ड्री की चिमनियों से निकलता जहरीला धुंए से क्षेत्र में रहने वालों का दम घुट रहा है लेकिन शायद रेलवे को इससे कोई सरोकार नहीं है।

रेलवे को बिजली कनेक्शन, आमजन को इनकार

जानकारों के अनुसार रेलवे ट्रैक से 100 मीटर की दूरी तक आवासीय और औद्योगिक बिजली कनेक्शन देने से ​जयपुर विद्युत वितरण निगम इनकार करता है। इसके पीछे विद्युत निगम कोर्ट के आदेश होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर देता है। जब​कि दूसरी तरफ रेलवे की बूट लॉन्ड्री तो रेलवे ट्रैक से ही सटी हुई है और जयपुर डिस्कॉम ने लॉन्ड्री को बिजली कनेक्शन भी आवंटित कर रखा है। ऐसे में एक ही क्षेत्र के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम के दोहरे मापदंड से लोगों में आक्रोश है।

पीएचईडी के ट्यूबवेलों को नहीं मिले बिजली कनेक्शन

रेलवे को सरकारी बताकर विद्युत निगम ने लॉन्ड्री के लिए बिजली कनेक्शन जारी कर दिए तो दूसरी तरफ जलदाय विभाग के ट्यूबवेलों के बिजली कनेक्शन आवेदनों की फाइल विद्युत निगम में धूल फांक रही हैं। पिछले 5 साल के दौरान रेलवे ट्रैक के नजदीक जलदाय विभाग ने पेयजल वितरण के लिए 25 से ज्यादा ट्यूबवेल खुदवाए लेकिन एक भी ट्यूबवेल के लिए विभाग को बिजली कनेक्शन नहीं मिला। जिसके चलते जलदाय विभाग को लाखों रुपए राजस्व का नुकसान भी हो चुका है।

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Updated on:
27 Jan 2026 12:12 pm
Published on:
27 Jan 2026 12:12 pm