जयपुर

माही के पानी से राजस्थान की बदल जाएगी तस्वीर, यमुना-रामजल सेतु के बाद अब 60 साल पुराने समझौते पर टिकी निगाहें

Mahi Water Agreement: यमुना जल विवाद और रामजल सेतु लिंक परियोजना के समाधान की दिशा में तेजी से बढ़ते कदमों ने राजस्थान में एक नई उम्मीद जगाई है। अब प्रदेश की निगाहें 60 साल पुराने माही जल बंटवारा समझौते पर टिक गई है।
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Jun 27, 2026
Mahi Dam
माही बांध। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। यमुना जल विवाद और रामजल सेतु लिंक परियोजना के समाधान की दिशा में तेजी से बढ़ते कदमों ने राजस्थान में एक नई उम्मीद जगाई है। अब प्रदेश की निगाहें 60 साल पुराने माही जल बंटवारा समझौते पर टिक गई है। राजस्थान, गुजरात और केंद्र में एक ही दल की सरकार होने से लोगों को उम्मीद है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो इस समझौते की समीक्षा कर राजस्थान के हिस्से का अधिक पानी सुनिश्चित किया जा सकता है। ऐसे में माही का मुद्दा अब सिर्फ वागड़ नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के जल भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

10 जनवरी, 1966 को राजस्थान-गुजरात के बीच माही जल समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार राजस्थान की 45 फीसदी और गुजरात की 55 प्रतिशत हिस्सेदारी है। माही बांध की कुल भराव क्षमता 77 टीएमसी है। इसमें गुजरात के लिए 40 टीएमसी पानी रिजर्व रखना होता है। राजस्थान को 25-37 टीएमसी ही उपयोग के लिए मिलता है।

समीक्षा हो तो राजस्थान को मिले फायदा

दो साल पहले माही जल क्रांति यात्रा में शामिल रहे राजस्थान किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष ब्रदीदान नरपुरा का कहना है कि इस समझौते के दौरान शर्त थी कि गुजरात के खेड़ा में नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद माही के पूरे पानी का उपयोग राजस्थान कर सकता है, लेकिन वहां पानी पहुंचने के बाद भी माही के पूरे पानी का उपयोग करने का अधिकार नहीं मिला है। माही का जो पानी व्यर्थ बहकर समुद्र में जा रहा है, उससे पश्चिमी राजस्थान को काफी फायदा हो सकता है। अब यदि इस समझौते का रिव्यू किया जाता है तो परिणाम सकारात्मक निकलने की प्रबल संभावना है।

सियासत भी शुरू, सरकार को लिखा पत्र

राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में माही बेसिन के अतिरिक्त जल (मानसून) को जालौर और सूखा प्रभावित जिलों तक पहुंचाने के लिए 5,900 करोड़ रुपए की योजना घोषित की है। इस पर सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि माही जल बंटवारे की शर्तों पर पुनर्विचार होना चाहिए। अनास नदी से जालौर-पाली जैसे जिलों को पानी उपलब्ध कराने के लिए बजट आवंटित हुआ है। वागड़ क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त पानी अन्य क्षेत्रों को दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने सरकार को पत्र लिखा है।

Published on:
27 Jun 2026 12:17 pm