
Rajasthan Panchayat-Nikay Elections : ग्राफिक्स फोटो पत्रिका
Rajasthan Panchayat-Nikay Elections : राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव के लिए हाईकोर्ट की ओर से तय 31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने में अब मात्र 34 दिन शेष रह गए हैं, जबकि पंचायत और निकाय दोनों के चुनाव एक साथ भी करा लिए जाएं तो भी इसके लिए 40 से 45 दिन का समय आवश्यक है। ऐसे में अब राज्य निर्वाचन आयोग के लिए 31 जुलाई तक चुनाव कराना मुश्किल लग रहा है। उधर, राज्य अन्य पिछडा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने सर्वे की जमीनी तैयारी शुरू कर दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले माह 31 जुलाई तक चुनाव कराने की डेडलाइन तय की, लेकिन चुनाव के लिए जिम्मेदार राज्य निर्वाचन आयोग को अब भी पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग से अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की जानकारी मिलने का इंतजार है। निर्वाचन आयोग इस बारे में पिछले दिनों रिमाइंडर भी सरकार को भेज चुका।
ओबीसी सर्वे को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के सदस्य गोपाल कृष्ण शर्मा ने पिछले दिनों बांसवाड़ा, सिरोही व डूंगरपुर जिलों में समीक्षा बैठक ली। इसमें अधिकारियों से जिले में ओबीसी परिवारों से संबंधित जानकारी देने को कहा गया, वहीं स्पष्ट किया कि सर्वे केवल ओबीसी परिवारों के संबंध में ही किया जाना है। उन्होंने तैयारियों का फीडबैक लेते समय यह भी स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग के अतिरिक्त अन्य परिवारों को सर्वे में शामिल करने की आवश्यकता नहीं है।
वहीं पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बीते दिनों राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के चुनाव अक्टूबर से दिसंबर के बीच कराने संबंधी बयान पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना बताया है। भीलवाड़ा में 15 जून को मीडिया से बातचीत में अरुण चतुर्वेदी ने कहा था कि 'एक राज्य, एक चुनाव' के संकल्प के तहत राज्य सरकार अक्टूबर से दिसंबर के बीच हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लेगी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रहे संयम लोढ़ा ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को यह ध्यान रखना चाहिए कि हाईकोर्ट राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई, 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है। उन्होंने कहा कि अरुण चतुर्वेदी अपना बयान वापस लें और सार्वजनिक रूप से कोर्ट के आदेशों के सम्मान तथा पालन की बात कहें।
Updated on:
28 Jun 2026, 8:10 AM IST
Published on:
28 Jun 2026, 8:09 AM IST
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