राजस्थान की छात्र राजनीति के 'जमीनी योद्धा' माने जाने वाले विनोद जाखड़ दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे। लेकिन इस ताजपोशी के साथ ही गलियारों में चर्चा उस 'जुगलबंदी' की है, जो कभी राजस्थान विश्वविद्यालय के मैदान में एक-दूसरे के धुर विरोधी हुआ करते थे।
जयपुर/दिल्ली। राजस्थान की छात्र राजनीति ने देश को कई बड़े नेता दिए हैं, लेकिन विनोद जाखड़ और रणवीर सिंघानिया की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 28 फरवरी को जब विनोद जाखड़ अध्यक्ष पद की शपथ लेंगे, तब मंच पर उनके साथ राजस्थान के ही एक और कद्दावर छात्र नेता रणवीर सिंघानिया भी होंगे, जो वर्तमान में NSUI के राष्ट्रीय सचिव हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही नेता कभी एक ही पद (राजस्थान यूनिवर्सिटी अध्यक्ष) के लिए आमने-सामने लड़ चुके हैं।
आज भले ही विनोद जाखड़ को कांग्रेस आलाकमान ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी हो, लेकिन साल 2018 में राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) के चुनाव में कहानी बिल्कुल उलट थी।
जब 2018 के चुनाव परिणाम आए, तो पूरे प्रदेश की सियासत दंग रह गई। निर्दलीय विनोद जाखड़ ने न केवल जीत हासिल की, बल्कि मुख्यधारा के दोनों संगठनों (NSUI और ABVP) के वोट शेयर को भी ध्वस्त कर दिया।
वक्त का पहिया घूमा और आज वही दोनों प्रतिद्वंद्वी NSUI की राष्ट्रीय टीम का मुख्य हिस्सा हैं।
विनोद जाखड़ के पदभार ग्रहण समारोह के लिए दिल्ली में विशेष तैयारियां की गई हैं।