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राजस्थान के इस शख्स का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में किया ज़िक्र, जानते हैं क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 22 फरवरी 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' (131वीं कड़ी) में सीकर के रामदेव सिंह की प्रेरणादायक कहानी साझा कर पूरे देश को 'अंगदान' के प्रति जागरूक किया है। रामदेव सिंह की कहानी केवल एक बीमारी को हराने की नहीं, बल्कि मृत्यु के द्वार से लौटकर तिरंगा फहराने की एक अद्भुत गाथा है।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 22 Feb 2026, 3:50 PM IST

जयपुर/सीकर। राजस्थान के शेखावाटी अंचल ने देश को कई वीर योद्धा दिए हैं, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसे 'जीवन के योद्धा' का ज़िक्र किया जिसने अपनी इच्छाशक्ति से चिकित्सा विज्ञान और खेल की दुनिया में नया इतिहास लिख दिया है। सीकर के रहने वाले रामदेव सिंह आज उन करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गए हैं, जो गंभीर बीमारियों के कारण अपनी हिम्मत हार चुके थे।

ये बोले प्रधानमंत्री, देखें VIDEO

इलेक्ट्रीशियन से 'वर्ल्ड मेडलिस्ट' तक का सफर

रामदेव सिंह राजस्थान के सीकर जिले के एक साधारण परिवार से आते हैं। बीमारी से पहले वे एक किसान और पार्ट-टाइम इलेक्ट्रीशियन के रूप में अपना जीवन यापन कर रहे थे। एक साधारण जीवन जी रहे रामदेव के लिए साल 2011 काल बनकर आया, जब उनकी सेहत अचानक बिगड़ने लगी।

गलत दवाइयों ने छीनी दोनों किडनियां

रामदेव सिंह के संघर्ष की कहानी काफी दर्दनाक रही है।

  • बड़ी लापरवाही: साल 2011 में जब वे बीमार हुए, तो बिना डॉक्टर की सलाह के और कुछ स्थानीय मेडिकल स्टोर से ली गई 'पेनकिलर्स' (दर्द निवारक दवाओं) के अधिक सेवन के कारण उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह फेल हो गईं।
  • अंधकारमय भविष्य: डॉक्टरों ने कह दिया था कि बिना ट्रांसप्लांट के रामदेव का बचना नामुमकिन है। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह न केवल भावनात्मक बल्कि आर्थिक रूप से भी बड़ा संकट था।

माँ का 'पुनर्जीवन' और 2012 का वो फैसला

जब कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, तब रामदेव की माँ ने अपने बेटे को नया जीवन देने का संकल्प लिया।

  • ममता की जीत: 2012 में उनकी माँ ने अपनी एक किडनी बेटे को डोनेट की।
  • भावुक कर देने वाली बात: रामदेव खुद अपनी माँ की सेहत को लेकर डरे हुए थे, लेकिन उनकी माँ ने कहा— "एक माँ के लिए बेटे को खोना, अपनी एक किडनी खोने से कहीं ज्यादा बड़ा दुख है।" इस ट्रांसप्लांट ने रामदेव को दूसरी जिंदगी दी।

खेल मैदान पर जलवा, जीत लिया गोल्ड

ट्रांसप्लांट के बाद लोग अक्सर भारी काम से बचते हैं, लेकिन रामदेव ने खुद को एथलीट के रूप में तैयार किया।

  • वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2025 (जर्मनी): पिछले साल जर्मनी के ड्रेस्डेन में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में रामदेव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • शानदार प्रदर्शन: उन्होंने 'ट्रैक एंड फील्ड' (30-39 आयु वर्ग) में एक गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रोंज सहित कुल 4 पदक जीतकर दुनिया को चौंका दिया।
  • राष्ट्रीय रिकॉर्ड: इससे पहले उन्होंने मुंबई नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी धाक जमाई थी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जताई खुशी

पीएम मोदी के संबोधन के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी रामदेव सिंह की सराहना की। सीएम ने कहा कि रामदेव सिंह न केवल राजस्थान का गौरव हैं, बल्कि वे अंगदान (Organ Donation) के प्रति समाज की सोच बदलने वाले एक सशक्त रोल मॉडल हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अंगदान जैसे पुनीत कार्य का संकल्प लेने का आह्वान किया।