जयपुर

Rajasthan News : तेल संकट के बीच राजस्थान बनेगा देश की ‘लाइफ लाइन’! थार से आई ये बड़ी Good News

ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने जैसलमेर के बाघेवाला फील्ड में उत्पादन का एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में राजस्थान की भूमिका को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

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Apr 06, 2026
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राजस्थान का सीमावर्ती जिला जैसलमेर एक बार फिर देश की तेल जरूरतों को पूरा करने का केंद्र बन गया है। ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने थार रेगिस्तान के बाघेवाला तेल क्षेत्र में उत्पादन का एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। 'जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन' से होने वाले तेल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यहाँ दैनिक उत्पादन 705 बैरल से बढ़कर अब 1,202 बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।

बाघेवाला फील्ड: राजस्थान से गुजरात तक का सफर!

जैसलमेर के बाघेवाला फील्ड में निकाला जाने वाला यह कच्चा तेल (Crude Oil) एक लंबी यात्रा तय करता है।

  • परिवहन: यहाँ से कच्चे तेल को टैंकरों के माध्यम से गुजरात के मेहसाणा स्थित ओएनजीसी (ONGC) सुविधाओं तक ले जाया जाता है।
  • रिफाइनिंग: मेहसाणा से इसे पाइपलाइन के जरिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की कोयाली रिफाइनरी भेजा जाता है, जहाँ इसका शुद्धिकरण होता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26: रिकॉर्ड उत्पादन के आंकड़े

आंकड़ों पर गौर करें तो राजस्थान के इस फील्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है:

  • वार्षिक उत्पादन: इस वर्ष कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ।
  • पिछला रिकॉर्ड: पिछले वर्ष यह आंकड़ा 32,787 मीट्रिक टन था। यह वृद्धि दर्शाती है कि राजस्थान की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारत अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।

CSS : वो तकनीक जिसने बदली तस्वीर

थार के रेगिस्तान में मिलने वाला कच्चा तेल काफी 'भारी' (High Viscosity) होता है, जिसे पारंपरिक तरीकों से निकालना लगभग नामुमकिन था। ऑयल इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता का असली हीरो CSS तकनीक है।

  • थर्मल रिकवरी: इसमें उच्च तापमान वाली भाप का उपयोग किया जाता है ताकि गाढ़ा तेल पतला हो सके और आसानी से बाहर आ जाए।
  • नई तकनीक का प्रयोग: भारत में पहली बार यहाँ 'फिशबोन ड्रिलिंग' और 'बेयरफुट कंप्लीशन' जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही हाइड्रोलिक सकर रॉड पंप और इलेक्ट्रिक डाउनहोल हीटर जैसे उपकरणों ने उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।

राजस्थान बेसिन: भारी तेल का खजाना

बाघेवाला तेल क्षेत्र राजस्थान बेसिन के बीकानेर-नागौर उप-बेसिन में स्थित है। यह भारत के उन गिने-चुने ऑनशोर क्षेत्रों में से एक है जहाँ भारी तेल पाया जाता है।

  • कुओं का विस्तार: कंपनी ने इस वर्ष 13 नए कुएं खोदे हैं, जिससे कुल कुओं की संख्या 52 हो गई है, जिनमें से 33 वर्तमान में सक्रिय रूप से तेल उगल रहे हैं।
  • क्षेत्रफल: बाघेवाला फील्ड लगभग 200.26 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर की इस सफलता से भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी। थार का रेगिस्तान अब केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि देश की 'ऊर्जा लाइफलाइन' के रूप में उभर रहा है। ऑयल इंडिया के एक अधिकारी ने कहा, "यह उपलब्धि थार क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय स्थितियों में हमारे तकनीकी कौशल का प्रमाण है और भारत की ऊर्जा लचीलापन को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।"

Published on:
06 Apr 2026 11:22 am