जयपुर

Rajasthan Politics: एक बार फिर निकला मानेसर का जिन्न, गहलोत बोले शेखावत ईमानदार है तों क्यों नहीं देते वॉइस सैंपल

Congress vs Bjp: गहलोत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शेखावत की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह निर्दोष हैं, तो विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो की जांच के लिए वॉइस सैंपल क्यों नहीं दे रहे?

2 min read
Sep 17, 2025
सोर्स: सोशल मीडिया एक्स

Manesar Case: जयपुर. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर 2020 में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। गहलोत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शेखावत की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह निर्दोष हैं, तो विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो की जांच के लिए वॉइस सैंपल क्यों नहीं दे रहे? गहलोत ने शेखावत पर संजय जैन मामले में बार-बार वॉइस सैंपल देने का विरोध करने का भी आरोप लगाया।

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कांग्रेस सरकार गिराने की थी सुनियोजित साजिश

गहलोत ने कहा कि 2020 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई थी। इसमें 30 विधायकों के समर्थन वापसी के दावे, 20 विधायकों को मानेसर ले जाना, और केंद्रीय नेताओं जैसे अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान और जफर इस्लाम से मुलाकात जैसे कई घटनाक्रम शामिल थे।

कांग्रेस नेताओं पर मारे थे छापे पर छापे

इसके अलावा, कांग्रेस नेताओं पर ईडी, आईटी और सीबीआई के छापे, बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों पर अचानक मुकदमे, और रिश्वत के मामले भी सामने आए। गहलोत ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में सरकार गिराने की तर्ज पर राजस्थान में भी यही प्रयास हुआ, जो कांग्रेस आलाकमान और जनता के आशीर्वाद से नाकाम रहा।

जांच एजेंसियों पर डाला था दबाव

गहलोत ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों पर दबाव डालकर तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, जिससे कोर्ट में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाई जा रही है। गहलोत ने सांसद हनुमान बेनीवाल के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी उस समय बीजेपी के साथ सहयोग की बात स्वीकारी थी। गहलोत ने शेखावत से सवाल किया कि वह अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए एक बार वॉइस सैंपल क्यों नहीं देते? यह मामला राजस्थान की सियासत में फिर से गरमाने की संभावना है।

हाईकोर्ट का फैसला: विधायकों खरीद-फरोख्त केस बंद,

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने पांच साल पुराने विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त मामले में बड़ी राहत देते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया। न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने भरत मालानी और अशोक सिंह की आपराधिक याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि एसीबी ने ही प्रकरण में अपराध सिद्ध न मानते हुए एफआर (फाइनल रिपोर्ट) पेश की है। ऐसे में एफआईआर को चुनौती देने का कोई आधार नहीं बचता।यह मामला 2020 के सियासी संकट से जुड़ा है, जब पहले एसओजी और फिर एसीबी ने दर्ज किया था। आरोप था कि याचिकाकर्ताओं ने विधायकों को लालच देकर अशोक गहलोत सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची।

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Published on:
17 Sept 2025 11:58 am
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