जयपुर

आपके सामने बच्चे मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन स्क्रीन के पीछे बन रहे निशाना, कहीं ये साइबर ट्राेलिंग तो नहीं ?

Cyber Trolling: माता-पिता सावधान: बच्चों के कमरों तक पहुंचा साइबर अपराध। माता-पिता को बच्चों के फोन यूज पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन डराने के बजाय विश्वास का माहौल बनाना जरूरी है।
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Sep 12, 2026
AI-generated image of Cyber Trolling
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मोहित शर्मा.

बच्चों के माता-पिता सावधान! साइबर अपराध अब बच्चों के कमरे तक पहुंच रहा है। बच्चा आपके सामने मुस्कुरा रहा हो, लेकिन फोन या सोशल मीडिया पर वह चुपके से निशाना बन रहा हो। अचानक अलग-थलग हो जाना, सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर देना, फोन इस्तेमाल के बाद परेशान दिखना- ये सब संकेत हैं कि कुछ गलत हो रहा है। बच्चों को बिना डांटे खुलकर बात करने का माहौल दें। अगर कोई साइबर अपराध का शिकार हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। हाल ही Ministry of Home Affairs के Indian Cybercrime Coordination Centre(I4C) ने इसकी जानकारी दी है।

बच्चे के व्यवहार में ये बदलाव नजर आएं तो अलर्ट हो जाएं

बच्चे के व्यवहार में यदि बदलाव नजर आएं तो आप अलर्ट हो जाएं। आजकल बच्चे ज्यादातर समय ऑनलाइन बिताते हैं। गेमिंग, सोशल मीडिया, चैटिंग- सब कुछ आसान है, लेकिन खतरे भी उतने ही। साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी प्रोफाइल से दोस्ती, अश्लील सामग्री भेजना या ब्लैकमेल करना जैसे अपराध बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर खास ध्यान देता है। हेल्पलाइन 1930 पूरे देश में 24 घंटे उपलब्ध है। जल्दी शिकायत करने से न सिर्फ मदद मिलती है, बल्कि कई मामलों में नुकसान भी रोका जा सकता है।

बच्चों के फोन यूज पर रखें नजर

माता-पिता को बच्चों के फोन यूज पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन डराने के बजाय विश्वास का माहौल बनाना जरूरी है। बच्चे अक्सर शर्म या डर से बात नहीं करते। अगर वे अचानक दोस्तों से दूरी बना लें, खाते बंद कर दें या मूड खराब रहे तो तुरंत बात करें।

राजस्थान में भी सामने आए कई मामले

राजस्थान में भी साइबर अपराधों के कई मामले सामने आए हैं। मुंबई पुलिस ने हाल ही में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने फेसबुक पर फर्जी निवेश स्कीम के जरिए एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को ठगा। लड़की ने पहले खुद और फिर मां के फोन से पैसे भेज दिए थे।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले में POCSO आरोपी को जमानत देते हुए एक साल तक सोशल मीडिया यूज पर रोक लगा दी। आरोपी पर नाबालिग के साथ साइबर स्टॉकिंग और उत्पीड़न का आरोप था।

लालसोट पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी वीडियो बेचने और साइबर ठगी में लिप्त था। राज्य में नाबालिगों द्वारा साइबर अपराधों में शामिल होने के आंकड़े भी चिंताजनक हैं।ये मामले साफ दिखाते हैं कि खतरा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं। राजस्थान पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के लिए अनाम शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध कराई है, ताकि डर के बिना रिपोर्ट किया जा सके।

तुरंत कार्रवाई करें, देरी न करें

साइबर अपराध की शिकायत करने में देरी न करें। 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय पोर्टल पर ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराएं। पोर्टल पर विशेष रूप से बच्चों से जुड़े मामलों में तेज कार्रवाई होती है। हानिकारक कंटेंट को जल्दी हटाने के लिए भी सिस्टम काम करता है। माता-पिता बच्चों को डिजिटल सुरक्षा सिखाएं- अनजान लोगों से बात न करना, निजी जानकारी शेयर न करना और संदिग्ध लिंक न खोलना। स्कूल और परिवार दोनों मिलकर जागरूकता बढ़ाएं। याद रखें, बच्चा मुस्कुरा रहा हो तो भी स्क्रीन के पीछे क्या हो रहा है, उसकी खबर रखें। खुला संवाद और तुरंत रिपोर्टिंग ही इस खतरे से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है। अगर कोई समस्या हो तो बिना हिचकिचाहट 1930 या cybercrime.gov.in का सहारा लें। बच्चे सुरक्षित रहें, तभी परिवार सुरक्षित रहेगा।

साइबर ट्रोलिंग क्या है और इससे कैसे निपटें

साइबर ट्रोलिंग या ऑनलाइन उत्पीड़न में आरोपी फर्जी अकाउंट बनाकर गाली-गलौज करते हैं, लगातार मैसेज भेजते हैं, मॉर्फ्ड फोटो या प्राइवेट तस्वीरें वायरल करने की धमकी देते हैं, सोशल मीडिया पर निगरानी रखते हैं, झूठी अफवाहें फैलाते हैं या ब्लैकमेल करते हैं। बच्चे अक्सर गेमिंग चैट, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट या व्हाट्सऐप पर निशाना बनते हैं। कई बार वे बार-बार संपर्क करते हैं, भले ही ब्लॉक कर दिया जाए।

सबूत कैसे सुरक्षित रखें ?

  • पूरी स्क्रीनशॉट लें जिसमें तारीख, समय, यूजरनेम, प्रोफाइल और मैसेज साफ दिखे। स्क्रीनशॉट को एडिट या क्रॉप न करें।
  • चैट एक्सपोर्ट करें (व्हाट्सऐप में “ExportChat” ऑप्शन यूज करें)।
  • URL, प्रोफाइल लिंक और पोस्ट को आर्काइव करें।
  • फोन या डिवाइस को मूल रूप में रखें, मैसेज डिलीट न करें।
  • सबूत को फोन, क्लाउड और पेन ड्राइव में बैकअप लें। पुलिस या कोर्ट में पेश करते समय इलेक्ट्रॉनिक सबूत का प्रमाणपत्र जरूरी हो सकता है।

क्या यह आपराधिक अपराध है ?

  • हां, कई मामलों में यह आपराधिक अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: धारा 78 (स्टॉकिंग/साइबर स्टॉकिंग), धारा 351 (आपराधिक धमकी/इंटिमिडेशन), धारा 75 (यौन उत्पीड़न), धारा 356 (मानहानि)।
  • आईटी एक्ट 2000: धारा 66C/66D (पहचान चोरी/फर्जी प्रोफाइल), धारा 67/67A (अश्लील सामग्री)।
  • बच्चों के मामले में POCSO एक्ट भी लागू हो सकता है, खासकर यौन प्रकृति के उत्पीड़न में।

सिर्फ असहमति या आलोचना अपराध नहीं है, लेकिन धमकी, बार-बार उत्पीड़न, ब्लैकमेल या अश्लील सामग्री भेजना कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है। तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

Updated on:
12 Sept 2026 01:01 pm
Published on:
12 Sept 2026 01:01 pm