
जयपुर। मानसून में यमुना के अतिरिक्त पानी को हथिनीकुंड से राजस्थान के हांसियावास तक पहुंचाने की राह आसान हो गई है। हरियाणा और राजस्थान के बीच सोमवार को मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर होंगे। नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होने वाले इस एग्रीमेंट से 32 साल पुराने यमुना जल समझौते को लागू किया जा सकेगा। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री भी इसमें मौजूद रहेंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए हरियाणा, राजस्थान व केंद्र का संयुक्त बोर्ड बनेगा।
गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और राजस्थान व हरियाणा के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में दोनों राज्यों के अधिकारी इस बोर्ड के गठन व संचालन को लेकर सहमत हुए। इस बोर्ड में हरियाणा और राजस्थान व केंद्र के अधिकारी शामिल होंगे और यह बोर्ड ही डीपीआर के आधार पर पाइपलाइन डालने और अन्य निर्माण के साथ ही बाद में संचालन व रखरखाव भी करेगा। चूरू के हांसियावास में तीन रिजर्वायर बनेंगे, जिसमें से एक से हरियाणा भी आवश्यकता अनुसार पेयजल के लिए पानी ले सकेगा।
बैठक के दौरान इस पर भी सहमति बनी कि यमुना का पानी चुरू और झुंझुनूं जिले तक पहुंचाने के लिए हरियाणा, राजस्थान और केन्द्र एक संयुक्त बोर्ड बनेगा। यही बोर्ड इस परियोजना के क्रियान्वयन, रखरखाव और संचालन करेगा। गौरतलब है कि दोनों राज्य पहले ही सैद्धान्तिक रूप से इस पर सहमत हो चुके थे और इसकी डीपीआर केन्द्रीय जल बोर्ड को भेज दी गई थी।
परियोजना का निर्माण हरियाणा में होना है। इसके लिए अधिकांश वित्तीय इंतजाम राजस्थान की ओर से होना है और पानी दोनों राज्यों के पीने के काम मे आएगा इसलिए हरियाणा, राजस्थान और केन्द्र इस बोर्ड के हिस्से होंगे। यह बोर्ड ही आगे इसका निर्माण व संचालन संबंधी कार्य करेगा। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूबीआरबी) भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होगा और यह किसी भी विवाद का निस्तारण करेगा।
पाइप लाइन से 8 जगह पर हरियाणा को पीने के पानी के लिए पाइंट्स देने की सहमति पहले बन गई थी। बैठक के दौरान यह भी सहमति बनी कि चुरू जिले के हाशियावास में तीन रिजर्वायर बनेंगे। इनमें से एक से हरियाणा भी आवश्यकतानुसार पीने का पानी ले सकेगा। यहां से पानी कैसे ले जाना है, इसका प्लान हरियाणा करेगा।