जयपुर

Patrika Foundation Day: पत्रिका ने 70 साल में तैयार की जमीं, जानें 2030 में कैसा होना चाहिए राजस्थान?

Rajasthan Patrika Foundation Day: राजस्थान पत्रिका के लिए 7 मार्च का दिन केवल स्थापना दिवस नहीं, बल्कि जनविश्वास, जनसंवाद और जनसरोकारों की सात दशक लंबी यात्रा का प्रतीक है।

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Mar 07, 2026
फोटो: पत्रिका

जयपुर। राजस्थान पत्रिका के लिए 7 मार्च का दिन केवल स्थापना दिवस नहीं, बल्कि जनविश्वास, जनसंवाद और जनसरोकारों की सात दशक लंबी यात्रा का प्रतीक है। वर्ष 1956 में कर्पूर चन्द्र कुलिश के स्वप्न और संकल्प से शुरू हुआ यह अखबार आज 70 वर्ष पूरे कर रहा है। इन सात दशकों में पत्रिका ने न केवल खबरों को पाठकों तक पहुंचाया, बल्कि समाज की धड़कनों को समझते हुए जनहित के मुद्दों को अपनी आवाज भी दी।

अब जब पत्रिका अपनी स्थापना के 71वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तब नजरें अगले पड़ाव 2030 पर भी टिक गई हैं। यही वह वर्ष होगा, जब राजस्थान पत्रिका अपने 75 वर्ष पूरे करेगा। इसलिए इस बार स्थापना दिवस की थीम केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का संकल्प भी है। सवाल यह है कि वर्ष 2030 में राजस्थान कैसा होना चाहिए?

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2030 का राजस्थान ऐसा होना चाहिए, जहां हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर नागरिक को सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ें और गांव से लेकर शहर तक आधारभूत सुविधाएं मजबूत हों।

राजस्थान पत्रिका का मानना है कि प्रदेश का भविष्य केवल सरकारों की नीतियों से नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता से भी तय होता है। इसलिए यह पहल सभी वर्गों की सामूहिक सोच को सामने लाने का प्रयास है। पत्रिका ने हमेशा जनभावनाओं को मंच दिया है। अब 2030 के राजस्थान की कल्पना भी उसी जनभागीदारी से आकार लेगी।

स्वास्थ्य: बढ़े स्वास्थ्य रैंकिंग… गांव-कस्बों तक हों सुपर स्पेशलिटी सेवाएं

विजन 2030 के अनुसार, राज्य का लक्ष्य 'राज्य स्वास्थ्य सूचकांक' में वर्तमान 16वीं रैंक से छलांग लगाकर शीर्ष 5 राज्यों में जगह पक्की करना होना चाहिए। जीवन प्रत्याशा स्वास्थ्य सुविधाओं के दम पर बढ़ेगी। सुरक्षित प्रसव और बेहतर शिशु देखभाल के जरिए मातृ मृत्यु दर घटाना होगा। शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए काम करने की जरूरत है। गंभीर बीमारियों के इलाज और नए डॉक्टरों की फौज तैयार करके लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार दी जा सकती है। सुपर स्पेशलिटी सेवाएं गांव-कस्बों तक बढ़ानी होंगी।

स्वास्थ्य संकेतकवर्तमान2030
जीवन प्रत्याशा (वर्ष में)69.972.0
मातृ मृत्यु दर8770
शिशु मृत्यु दर3020
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज88%100%

चिकित्सा शिक्षा: सभी जिलों में हो कम से कम एक-एक मेडिकल कॉलेज

प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर करने और उच्च शिक्षा के अवसरों के लिए मेडिकल कॉलेज संख्या में इजाफा करने की जरूरत है। अभी राज्य में 42 मेडिकल कॉलेज हैं। 2030 राज्य के सभी जिलों में एक-एक मेडिकल कॉलेज खुले। जयपुर, कोटा, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज भी खोले जा सकते हैं। इन मेडिकल कॉलेजों में शोध के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। राज्य में नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने की संभावनाओं पर कार्य करने की भी जरूरत है।

संकेतकवर्तमान2030
मेडिकल कॉलेज4250
क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान0001
सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं1533
सुदृढ़ ट्रोमा सेंटर1533
मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन0733
जिला आयुर्वेद अस्पताल3341
ब्लॉक स्तरीय आयुष अस्पताल84230

जल प्रबंधन: एआइ और स्मार्ट तकनीक से रोक सकते हैं जल की बर्बादी

मरुस्थलीय परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान ने वर्ष 2047 तक सुरक्षित पेयजल और सतत जल प्रबंधन की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। लंबी के बजाय छोटी अवधि के लक्ष्यों की जरूरत है। 2030 तक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान से राज्य जल सुरक्षा अभेद्य बना ले, इस पर कार्य करने की जरूरत है। जल संरक्षण के लिए एआइ-सक्षम निगरानी प्रणाली और स्मार्ट प्रणालियों का सहारा लिया जा सकता है।

पर्यटन: एआइ और स्मार्ट तकनीक से पर्यटन की ओर बढ़ाने होंगे कदम

राजस्थान को 2030 तक 'वैश्विक पर्यटन शक्ति' के रूप में स्थापित करने की जरूरत है। राज्य विरासतों के संरक्षण के साथ-साथ स्मार्ट नवाचारों और आधुनिक तकनीक का संतुलित समन्वय रहेगा तो दुनियाभर के पर्यटकों के लिए पहली पसंद बन जाएगा। राजस्थान केवल किलों और महलों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सहभागिता से पर्यटन के शौकीनों को भी अपनी ओर आकर्षित करेगा।

पर्यटन संकेतकवर्तमान2030
राज्य की पर्यटन में भागीदारी7.1%9%
राज्य में पर्यटकों का औसत निवास1.5 दिन2.3 दिन

सिंचाई: सिंचाई नेटवर्क का हो सुदृढ़ीकरण

राज्य में कृषि और किसान की उन्नति के लिए सिंचाई विजन 2030 बनाकर उस पर काम शुरू करने की जरूरत है। आगामी वर्षों में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए। बदलती जलवायु और जल संकट को देखते हुए जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना प्राथमिकताओं में रखना होगा। राज्य में जल उपयोग दक्षता 35 प्रतिशत है। नई तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के जरिए पानी की बर्बादी को रोका जाए। उपलब्ध पानी का अधिकतम उपयोग खेतों में हो।

स्कूल शिक्षा: जीरो ड्रॉप-आउट से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर, युवा गढ़ेंगे तकदीर

भविष्य की पीढ़ी को गढ़ने के लिए 'शिक्षा विजन 2030' के लक्ष्य के साथ बढ़ने की जरूरत है। स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़े, उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़कर पढ़ाई के बीच में स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को पूरी तरह खत्म किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने पर नामांकन 100% और ड्रॉप-आउट शून्य होगा। तभी राज्य सही मायनों में शिक्षित प्रदेश की श्रेणी में अग्रणी बन पाएगा।

संकेतकवर्तमान2030
सकल नामांकन अनुपात (प्रारंभिक)93.6%100%
सकल नामांकन अनुपात (माध्यमिक)80.2%90%
सकल नामांकन अनुपात (उच्च माध्यमिक)62%80%
स्मार्ट क्लास रूम वाले स्कूल50%75%
ड्रॉप आउट दर (माध्यमिक)11.1%0%

कृषि: मिट्टी की सेहत और थाली में भोजन की पौष्टिकता पर फोकस

कृषि क्षेत्र में वर्ष 2030 तक उन्नत बीजों, बेहतर तकनीक, मौसम की सटीक जानकारी के जरिए फसलों की उत्पादकता में भारी इजाफा करने का लक्ष्य पूरा करने की जरूरत है। इसके साथ ही थाली की पौष्टिकता और मिट्टी की उर्वरता पर भी ध्यान देना होगा। प्रोटीन की जरूरतों को देखते हुए दलहन (दालों) की उत्पादकता को भी बढ़ाना होगा। तिलहन के क्षेत्र में भी बढ़त के रोडमैप तैयार पर कार्य करना होगा।

संकेतकवर्तमान2030
अनाज उत्पादकता2.202.40
दलहन उत्पादकता0.660.68
तिलहन उत्पादकता1.451.60
फल फसलें11.0012.40
सब्जी फसलें12.1614.50
फसल बीमा कवरेज28सभी फसलें
मौसम रिपोर्ट स्टेशन2,63511,175

सड़क: रोड नेटवर्क अर्थव्यवस्था को गति देगा, मुख्यधारा से जुड़ेंगे गांव

राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने, आवागमन सुगम बनाने के लिए सड़क मार्ग को मजबूती देने की जरूरत है। आने वाले वर्षों में एक्सप्रेस-वे से लेकर ग्रामीण संपर्क सड़कों तक के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। माल ढुलाई और यात्रा का समय सीमा कम होगा। एमडीआर सड़कों का सुदृढ़ीकरण कर उन्हें 2 लेन में अपग्रेड करने का काम तेजी से किया जाना चाहिए।

संकेतक (किमी में)वर्तमान2030
एक्सप्रेस वे9911,821
स्टेट और एनएच 4 लेन6073,000
एमडीआर 2 लेन4,7226,377
गांव-बस्ती की संपर्क सड़क1,60,2191,70,000

जीडीपी ही नहीं, 'हैप्पीनेस' पर हो फोकस

जस्थान अब केवल अपनी रा ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की आधुनिक और समावेशी तस्वीर के लिए भी दुनियाभर में पहचाना जाए। राज्य को विकसित प्रदेश की श्रेणी में लाने के लिए आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरण सुरक्षा और हैप्पीनेस का एक अनूठा खाका तैयार करने की जरूरत है। राज्य को 100% साक्षरता और शिक्षा की पहुंच का लक्ष्य 2030 तक पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा चाहिए। युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास, उद्यमिता और नेतृत्व के विशेष अवसर सृजित किए जाएं। कार्बन न्यूट्रलिटी, जैव विविधता संरक्षण और हरित ऊर्जा को विशेष महत्व देकर भविष्य को सुरक्षित बनाया जाए।

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