हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पेश की गई है। याचिका पर संभवत: अगले सप्ताह सुनवाई होगी।
जयपुर।
लोक सेवकों के खिलाफ इस्तगासे पर जांच शुरू होने से पहले सरकार की अनुमति आवश्यक होने संबंधी अध्यादेश के बारे में दिए बयान को लेकर हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पेश की गई है। याचिका पर संभवत: अगले सप्ताह सुनवाई होगी।
यह आपराधिक अवमानना याचिका अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी की ओर से पेश की गई है। याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने 7 सितंबर 2017 को लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए अध्यादेश जारी किया।
अध्यादेश को लेकर 27 अक्टूबर 2017 को एक समाचार पत्र (पत्रिका नहीं) में मुख्यमंत्री का साक्षात्कार प्रकाशित हुआ। इसमें कहा था कि सीआरपीसी की धारा 156(3) के दुरुपयोग की शिकायतें आ रही थी और 73 प्रतिशत मामले झूठे पाए जाते हैं। ऐसे मामलों के दर्ज होने से प्रतिष्ठित और ईमानदार लोकसेवकों की प्रतिष्ठा पर विपरीत असर हुआ और उनका मनोबल टूटा। गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने भी इसी तरह का बयान दिया।
याचिका में कहा कि सीएम और गृहमंत्री के बयान से न्यायपालिका की अवमानना हुई। नियमों के तहत महाधिवक्ता से अवमानना याचिका पेश करने या याचिकाकर्ता को अनुमति देने की गुहार की गई। इसके बावजूद न याचिका पेश की गई और न ही याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति दी गई।
...इधर, भ्रष्टाचार पर अपनों से ही घिरी सरकार
विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार का मुद्दा जमकर उछला। सत्तापक्ष के विधायकों के साथ विपक्ष ने पुलिस में फैले भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा। विधायकों ने कहा कि छोटी मछलियों को पकड़ा जा रहा है, बड़े अफसरों पर कोई हाथ नहीं डाल रहा। बड़े अफसर भ्रष्ट होते हैं, तभी छोटे भी भ्रष्टाचार करते हैं।
विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने रिश्वत मामले में पकड़े गए पुलिसकर्मियों का सवाल उठाया। इस पर गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि 4 साल में पुलिसकर्मियों के रिश्वत लेने के 275 प्रकरण सामने आए। इनमें से 171 में 200 को गिरफ्तार किया गया।
आहूजा इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और कहा कि कांस्टेबल से लेकर सीआई को पकड़ा गया लेकिन पुलिस उप अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, आईपीएस अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। एक एसपी तो बदसलूकी के लिए मशहूर हो गए हैं।
कांग्रेस ने भी इस पर सरकार को घेरा और कहा कि कानून-व्यवस्था की हालत खराब है। मामला बिगड़ते देख संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने उप सचेतक मदन राठौड़ को आहूजा के पास भेजकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। कांग्रेस ने कहा कि सत्तापक्ष अपने ही विधायक को धमका रहे हैं।