
बुजुर्गो के लिए बेपरवाह हुई सरकार—
—आज दिन तक राज. विवि में इसकी शुरुआत नहीं हुई
—सोशलॉजी डिपार्टमेंट से शुरु करना हुआ था तय
—सेल्फ फाइनेंस से शुरु करने पर भी बनी थी सहमति
टीना बैरागी शर्मा
जयपुर
सरकार बुजुर्गो के लिए कितनी बेपरवाह है इसकी बानगी राज. विवि में पिछले 12 साल से अटके पड़े 'पीजी डिप्लोमा इन जीरिएट्रिक कोर्स' की बदहाली पर देखी जा सकती है। इस कोर्स का मसौदा और सिलेबस तैयार करने वाले प्रोफेसर भी अब तो इसके शुरु होने की आस खो चुके है।
कहने को तो यह कोर्स वर्ष 2007 में बोर्ड आॅफ स्टडीज ने पास कर दिया था लेकिन इसे शुरु करने के लिए यूनिवर्सिटी का एक भी डिपार्टमेंट आगे नहीं आया। जबकि इसे शुरु करने के लिए सोशलॉजी डिपार्टमेंट का नाम तय हुआ था। आलम ये है कि बुजुर्गो की देखभाल व नर्सिंग की बेसिक जानकारी सीखाने वाला प्रदेश का यह एकमात्र जीरिएट्रक कोर्स आज दिन तक शुरु नहीं हो सका है। सरकार बुजुर्गो के लिए 'एज फ्रेंडली' माहौल देने के बड़े—बड़े वादे करती रही है लेकिन जब एज फ्रेंडली माहौल तैयार करने की पहली कड़ी यानि कि जीरिएट्रिक पढ़ाने के लिए जब एक कोर्स का प्रारुप तैयार हो गया तो उसे शुरु करने में ही वह फिसड्डी साबित हो गई है।
कोर्स शुरु होने से ये होगा फायदा—
यदि यह कोर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाने लगा तो इससे हर उस बुजुर्ग व्यक्ति की देखभाल व नर्सिंग केयर करने में मदद मिल सकेगी जिसकी बेसिक व प्रेक्टिकल जानकारी का आमतौर पर ख्याल नहीं रखा जाता है। इसी सोच के साथ इसका प्रारुप तैयार करने वाली इंडियन जेरोंटोलॉजिकल एसोसिएशन ने दुबारा सरकार को रिमाइंडर नोटिस भेजा है। अब यह देखने वाली बात होगी कि सरकार इस नोटिस को गंभीरता से लेकर कोर्स शुरु करती है या इस बार भी ये कोर्स सिर्फ सरकारी फाइलों में अटक कर रह जाएगा।
कोर्स शुरु करने वाले प्रोफेसर हुए रिटायर—
—'पीजी डिप्लोमा इन जीरिएट्रिक कोर्स' को बहुत ही उम्मीद के साथ तैयार किया था। इसे शुरु करने को लेकर लगभग सारी तैयारी पूर्ण हो चुकी थी। जहां तक बजट का सवाल है उस पर भी सेल्फ फाइनेंस करने की बात पर चर्चा हुई थी। लेकिन इसे शुरु करने को लेकर ना तो सरकार रुचि ले रही है ना ही विश्व विद्यालय। अब तो कोर्स शुरु करने वाले प्रोफेसर्स की टीम भी रिटायर हो चुकी है। सरकार को पत्र लिखते रहते हैं शायद कभी तो सरकार जागेगी।
के.एल. शर्मा, रिटायर प्रोफेसर व फाउंडर
इंडियन जेरोंटोलॉजिकल एसोसिएशन