
राजस्थान की नौकरशाही और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों नए मुख्य सचिव की नियुक्ति और वर्तमान सीएस वी. श्रीनिवास के सेवा विस्तार को लेकर जबरदस्त हलचल है। दरअसल, राज्य के वर्तमान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का नियमित कार्यकाल 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो रहा है और वे इसी दिन सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इस बीच खबर ये भी है कि राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने हाल ही में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को एक पत्र भेजकर वी. श्रीनिवास को पूरे 1 वर्ष का सेवा विस्तार देने का आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है। इस पत्र के सामने आने के बाद जयपुर के शासन सचिवालय से लेकर दिल्ली के नार्थ ब्लॉक तक नए प्रशासनिक फेरबदल को लेकर लॉबिंग और रणनीतिक चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं।
राजस्थान की प्रशासनिक बारीकियों को समझने वाले जानकारों और ब्यूरोक्रेसी विशेषज्ञों का मानना है कि भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा वी. श्रीनिवास के लिए सेवा विस्तार मांगने के पीछे प्रशासनिक कारण मौजूद हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान में आने वाले दिनों में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। सरकार का मानना है कि इन चुनावों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए वी. श्रीनिवास जैसा अनुभवी और सख्त प्रशासनिक मुखिया पद पर होना बेहद जरूरी है।
वहीं, हाल ही में संपन्न हुए 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान राज्य में कुल 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने और नीतिगत मंजूरियों में तेजी लाने के लिए सरकार प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना चाहती है।
इसके अलावा, ये भी बताया जाता है कि 1989 कैडर के सीनियर आईएएस वी. श्रीनिवास की कार्यशैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह काफी पसंद करते हैं। केंद्र सरकार की फ्लैगशिप और पुरानी योजनाओं की समयबद्ध समीक्षा बैठकों और उनके त्वरित क्रियान्वयन में वी. श्रीनिवास का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है।
मुख्य सचिव के सेवा विस्तार की प्रक्रिया पारदर्शी और केंद्र-केंद्रित होती है।
प्रस्ताव का रूट: राज्य सरकार की ओर से भेजा गया प्रस्ताव केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास पहुंच चुका है।
अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट (ACC): विभाग के सचिव इस प्रस्ताव को कैबिनेट की नियुक्ति और सेवा विस्तार समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
प्रधानमंत्री की मंजूरी अनिवार्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिति के पदेन अध्यक्ष हैं, इसलिए वी. श्रीनिवास को 1 साल का सेवा विस्तार मिलेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला पीएम मोदी के अनुमोदन के बाद ही जारी किया जाएगा।
केंद्र में मजबूत पकड़ का फायदा: दिल्ली और राजस्थान दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार होने और केंद्र में वी. श्रीनिवास के सीधे संपर्कों के चलते सचिवालय में इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि उन्हें एक्सटेंशन मिल सकता है।
यदि केंद्र सरकार द्वारा किसी कारणवश सेवा विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जाती है, तो राजस्थान के अगले प्रशासनिक प्रमुख (CS) की रेस में 1992 और 1993 बैच के 5-6 अत्यंत वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
अभय कुमार (IAS: 1992 बैच): वरिष्ठता और लंबे प्रशासनिक अनुभव के मामले में अभय कुमार को सबसे स्वाभाविक और मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उनका रिटायरमेंट अगस्त 2028 में होना है।
अपर्णा अरोड़ा (IAS: 1993 बैच): वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), खान एवं पेट्रोलियम विभाग के पद पर कार्यरत अपर्णा अरोड़ा यदि इस पद पर चुनी जाती हैं, तो वे राज्य की शीर्ष महिला प्रशासनिक प्रमुख बनेंगी। वे वर्ष 2029 में सेवानिवृत्त होंगी।
अखिल अरोड़ा (IAS: 1993 बैच): मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाने के कारण अखिल अरोड़ा का पलड़ा भी इस दौड़ में काफी भारी है।
शिखर अग्रवाल (IAS: 1993 बैच): मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य के प्रशासनिक गलियारों में गहरा प्रभाव रखने वाले शिखर अग्रवाल भी सीएस की रेस में एक बड़ा नाम हैं।
रजत कुमार मिश्रा (IAS: 1992 बैच) और तन्मय कुमार (IAS: 1993 बैच): ये दोनों वरिष्ठ अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार में दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। हालांकि, राजस्थान कैडर के सीनियर अधिकारी होने के नाते इनके नाम भी विचारणीय सूची में शामिल हैं।
राजस्थान में मुख्य सचिव को सेवा विस्तार मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले राज्य में कांग्रेस की सरकार रहने के बावजूद तत्कालीन मुख्य सचिव उषा शर्मा को केंद्र सरकार से 6 महीने का सेवा विस्तार मिला था।
सीनियर आईएएस अधिकारी उषा शर्मा को 31 जनवरी 2022 को राजस्थान की मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। वे 30 जून को रिटायर होने वाली थीं, लेकिन केंद्र सरकार के साथ उनके सीधे संपर्कों और बेहतर प्रशासनिक तालमेल के चलते उन्हें जून के बाद 6 महीने का अतिरिक्त कार्यकाल दिया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामान्यतः मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की पसंद का अधिकारी होता है। हालांकि, मौजूदा सरकार के दौर में पहली बार दिल्ली यानी केंद्र सरकार की सीधी पसंद के अधिकारी को राजस्थान का मुख्य सचिव बनाया गया है। सुधांशु पंत के दिल्ली लौटने के बाद वी. श्रीनिवास को भी दिल्ली से ही राजस्थान का सीएस बनाकर भेजा गया था, जिससे उनके एक्सटेंशन की संभावना काफी प्रबल नजर आ रही है।