राजधानी जयपुर के दोनों नगर निगम में पावर की लड़ाई चल रही है। तभी तो ग्रेटर के अधिकारियों को हैरिटेज की जिम्मेदारी दे दी गई। ये काम डीएलबी ने उस समय किया जब हैरिटेज नगर निगम ने कई से संचालित अवैध डेयरी पर कार्रवाई की। इससे मैसेज यह गया कि अवैध रूप से डेयरी संचालित करने वाले लोगों के यह आदेश निकलवाया है।
अश्विनी भदौरिया.जयपुर. शहर के दोनों नगर निगम में पावर की लड़ाई चल रही है। शहरी सरकार में अच्छी शाखा मिले, इसकी चाहत राजस्थान म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आरएमएस) और प्रतिनियुक्ति पर आने वाले राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आरएएस) के अधिकारियों को रहती है। हाल ही स्वायत्त शासन विभाग ने हैरिटेज निगम पशु प्रबंधन शाखा की जिम्मेदारी ग्रेटर निगम उपायुक्त रजनी माधीवाल को दे दी। ऐसा कर राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना की है। इस मामले में स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक कुमार पाल गौतम का कहना है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कार्यभार दिया है।
ये था मामला
दो नगर निगम बनने के बाद आयुक्त की जिम्मेदारी एक ही आइएएस के पास थी। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। इसी तरह उद्यान और गैराज शाखा के उपायुक्त दोनों जगह काम कर रहे थे। यह मामला कोर्ट में है। हालांकि, कोर्ट इस मामले में कह चुका है कि जब नगर निगम अलग-अलग हैं तो अधिकारियों की भी अलग व्यवस्था सरकार करे। इसके बाद दोनों अधिकारियों को हैरिटेज निगम ने रिलीव कर दिया था।
अवैध डेयरी संचालित करने वाले खुश
राज्य सरकार की ओर से यह आदेश उस समय आया जब हैरिटेज निगम ने किशनपोल जोन कार्यालय के पास संचालित अवैध डेयरी से गोवंश को पकड़ गोशाला भेजा था। 21 और 22 सितम्बर को दो दिन की कार्रवाई में निगम ने 125 गोवंश को पकड़ हिंगोनिया गोशाला भेजा था। इस कार्रवाई के तीन दिन बाद डीएलबी ने आदेश निकालकर हैरिटेज निगम पशु प्रबंधन शाखा की जिम्मेदारी ग्रेटर निगम की उपायुक्त को दे दी।
इधर, ये हाल
ग्रेटर निगम की पशु प्रबंधन शाखा सीमा विवाद में उलझकर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। विद्याधर नगर में उन लोगों को नोटिस थमा दिए, जिनके घर पर एक ही गाय है। जिन लोगों को निगम ने नोटिस जारी किए हैं, उनमें इस बात को लेकर नाराजगी है कि अवैध डेयरियों पर कार्रवाई करने की बजाय घर में गाय पालने वालों को परेशान किया जा रहा है।
कोर्ट जता चुका आपत्ति
ओपी टांक की जनहित याचिका में न्यायालय ने पूर्व में आदेश दिया था कि जयपुर, जोधपुर कोटा में जब दो-दो नगर निगम हो गए तो एक ही आयुक्त कैसे काम कर सकता है। टांक की एक अन्य जनहित याचिका न्यायालय में लम्बित है। कोर्ट उपायुक्तों को हटाने के निर्देश भी दे चुका है। राज्य सरकार से कोर्ट ने स्पष्टीकरण भी मांगा था।
-अभिनव शर्मा, एडवोकेट
इन शाखाओं की डिमांड सर्वाधिक
-राजस्व
-उद्यान
-गैराज
-पशु प्रबंधन
-आयोजना
-स्वास्थ्य
करीब 5 वर्ष बाद उपायुक्त की वापसी
ग्रेटर निगम की गैराज और उद्यान शाखा में बीते दिनों उपायुक्त की नियुक्ति निगम प्रशासन ने की है। दोनों ही जगह करीब पांच वर्ष से उपायुक्त नहीं थे। उद्यान शाखा में उद्यानविज्ञ रवींद्र सिंह, गैराज शाखा में अतुल शर्मा पदेन उपायुक्त काम कर रहे थे।