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Rajasthan Accident: 2 साल में सड़कों पर कुचले गए 23,528 लोग, दुर्घटनाओं का कारण बने भारी वाहन चालक, बिना ट्रेनिंग के मिल रहे लाइसेंस

Rajasthan Road Accident Data: राजस्थान की सड़कों पर पिछले 2 सालों में हुई दुर्घटनाओं ने चिंता का माहौल बना दिया है, जिसमें 23,528 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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Truck accident

File Photo- Patrika

Lack of Driver Training in Rajasthan: राजस्थान की सड़कें अब सफर का जरिया नहीं, बल्कि खौफ का पर्याय भी बन चुकी हैं। सरकारी फाइलों में भारी वाहनों के चालकों की ट्रेनिंग पूरी दिखाई जा रही है, लेकिन हकीकत में बिना किसी 'ट्रेनिंग ट्रैकर' और कड़े इम्तिहान के लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। इसका भयावह परिणाम यह है कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश की सड़कों पर 23,528 लोग कुचले गए।

कुचलने वाले चालकों को लाइसेंस जारी करने वाले एक भी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करना तो दूर, विभागीय कार्रवाई तक नहीं की गई। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राजस्थान में भारी वाहनों के चालकों का लाइसेंस बनाने के लिए एक भी ट्रेनिंग ट्रैकर नहीं है, इसके बावजूद कागजी खानापूर्ति करके भारी वाहन चालकों के लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।

नियमानुसार दो दिन की ट्रेनिंग के बाद व्यवसायिक वाहनों का लाइसेंस नवीनीकरण किया जाए, जबकि ऐसा नहीं होता और हर वर्ष लगभग 2 लाख वाहन चालक व्यावयायिक वाहनों के लाइसेंस का नवीनीकरण करवाते हैं और 60 से 70 हजार लाइसेंस नए बनते हैं।

डराते हैं ये आंकड़े

प्रदेश में वर्ष 2025 में 11,816 तो 2024 में 11,712 लोग सड़कों पर वाहन चालकों की लापरवाही से कुचले गए। जबकि जयपुर कमिश्नरेट में वर्ष 2025 में 835 व 2024 में 860 लोगों के खून से सड़कें लाल हुईं। कमिश्नरेट में इस वर्ष अब तक 28 लोगों की जान जा चुकी है।

5 दिन में वाहन चालकों की पकड़ी लापरवाही

  • 4106 : शराब पीकर वाहन चलाते मिले
  • 23738 : तेज गति से दौड़ाते मिले
  • 18387 : रॉन्ग साइड दौड़ाते मिले-1662 : खतरनाक तरीके से चलाते(प्रदेश में 5 नवम्बर से 9 नवम्बर 2025 तक की कार्रवाई)

लाइसेंस वापस लेने का प्रावधान

शराब पीकर वाहन चलाने, बिना अनुमति के रेसिंग करना, खतरनाक वाहन चलाना, तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाने सहित कई मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लघंन करने पर लाइसेंस वापस लेने का प्रावधान है। लेकिन कार्रवाई लाइसेंस निलम्बित करने तक सीमित है।

अनिवार्य रूप से मुकदमा दर्ज हो

विदेशों में सख्त पारदर्शिता के साथ लाइसेंस बनाए जाते हैं, अपने यहां खानापूर्ति कर लाइसेंस जारी कर दिए जाते हैं। सड़क पर मौत बांटने के लाइसेंस देने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। किसी भी दुर्घटना के आरोपी चालक को लाइसेंस जारी करने वाली पूरी परीक्षण प्रक्रिया से दोबारा गुजारना चाहिए। यदि आरोपी परीक्षणों में असफल रहता है, तो उसे लाइसेंस देने वाले अधिकारी या एजेंसी की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

ऐसे मामलों में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, लापरवाही और भ्रष्टाचार रुकेगा और अयोग्य चालकों को सड़क पर उतरने से रोका जा सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

दीपक चौहान, अधिवक्ता, राजस्थान हाईकोर्ट

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