Bulletproof Car in Jaipur: बिंदायका थाना इलाके में शनिवार को प्रॉपर्टी डीलर कमलदीप मीणा पर कथित फायरिंग के मामले में सामने आया है कि प्रॉपर्टी डीलर मीणा की गाड़ी बुलेट प्रूफ हैं। ऐसे में बुलेट प्रूफ गाड़ी पर भी सवाल खड़े हो गए है। दरअसल, जयपुर आरटीओ कार्यालय में किसी भी गाड़ी के बुलेट प्रूफ होने की जानकारी नही है।
Bulletproof Car in Jaipur: बिंदायका थाना इलाके में शनिवार को प्रॉपर्टी डीलर कमलदीप मीणा पर कथित फायरिंग के मामले में सामने आया है कि प्रॉपर्टी डीलर मीणा की गाड़ी बुलेट प्रूफ हैं। ऐसे में बुलेट प्रूफ गाड़ी पर भी सवाल खड़े हो गए है। दरअसल, जयपुर आरटीओ कार्यालय में किसी भी गाड़ी के बुलेट प्रूफ होने की जानकारी नही है।
नियमों की बात करें तो सामान्य वाहन को बुलेट प्रूफ बनवाना केवल तकनीकी काम नहीं है, बल्कि इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट की पालना करना भी अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कार को बुलेट प्रूफ करवाने से पहले क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से मॉडिफिकेशन की अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके बाद वाहन की पंजीयन प्रमाण पत्र (आरसी) में भी इसे 'आर्म्ड व्हीकल के रूप में अपडेट कराया जाता है। बिना अनुमति के वाहन को बुलेट-प्रूफ बनवाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
जानकारों के अनुसार बुलेट प्रूफिंग की प्रक्रिया में वाहन के कई हिस्सों को विशेष सुरक्षा तकनीक से लैस किया जाता है। इसमें सबसे अहम होता है बुलेट-रोधी कांच, जो सामान्य कांच की तुलना में कई परतों से बना होता है और गोलियों के प्रभाव को सहन करने में सक्षम होता है।
इसके अलावा कार में रन-फ्लैट टायर लगाए जाते हैं. जी पंचर होने के बाद भी कुछ दूरी तक वाहन को चलने योग्य बनाए रखते हैं। सुरक्षा के लिहाज से विस्फोट-रोधी ईंधन टैंक भी लगाया जाता है, जिससे किसी हमले या धमाके की स्थिति में आग फैलने का खतरा कम हो जाता है।
वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि बुलेट-प्रूकिंग का खर्च वाहन के मॉडल और सुरक्षा स्तर पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर एसयूवी को बुलेट-प्रूफ बनाने में लगभग 35 से 40 लाख रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
देश में बुलेट प्रूफिंग का काम करने वाली कंपनियां मुख्य रूप से बड़े शहरों में स्थित हैं। खासतौर पर गुरुग्राम (हरियाणा), मोहाली (पंजाब) और मुंबई (महाराष्ट्र) में ऐसी कई अधिकृत कंपनियां वाहन सुरक्षा मॉडिफिकेशन का काम करती है।
किसी भी वाहन में मॉडिफिकेशन करने से पहले सूचना आरटीओ कार्यालय में देनी होली है। इसका कारण बताया जाता है। इसके बाद आरसी में संशोधन किया जाता है। बिना अनुमति मॉडिफिकेशन कराने पर एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई होती है। राजेन्द्र सिंह शेखावत, आरटीओ प्रथम जयपुर