Silent Blood Clot: हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के बीच अब एक और खतरनाक बीमारी तेजी से चिंता बढ़ा रही है। पल्मोनरी एम्बोलिज्म (पीई) ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की नसों में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर रक्त प्रवाह रोक देता है। कई मामलों में मरीज को अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और कुछ ही मिनटों में कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है।
Silent Blood Clot: हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के बीच अब एक और खतरनाक बीमारी तेजी से चिंता बढ़ा रही है। पल्मोनरी एम्बोलिज्म (पीई) ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की नसों में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर रक्त प्रवाह रोक देता है। कई मामलों में मरीज को अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और कुछ ही मिनटों में कार्डियक अरेस्ट
तक हो सकता है।
राजस्थान के सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीप वैन थ्रम्बोसिस (डीवीटी) और उससे जुड़े पीई के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि लोग शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
डीवीटी की शुरुआत अक्सर पैरों में सूजन, दर्द या भारीपन से होती है। लेकिन यही थक्का नसों के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाए तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म बन सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल, बड़ी सर्जरी, लंबे समय तक बेड रेस्ट और शरीर पर गंभीर अंदरूनी चोटें भी ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ाती हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठने वाले, कोचिंग स्टूडेंट्स, ऑफिस कर्मी और लंबा सफर करने वाले लोग ज्यादा रिस्क में हैं। डीवीटी के शुरूआती लक्षण नजरअंदाज करने के कारण और समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है। ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठने से पैरों में सूजन,दर्द या भारीपन महसूस होता है। लोग इन शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जो भविष्य में घातक साबित हो सकता है।शुरूआत के लक्षणों को समझकर समय पर इलाज मिलने से इस बीमारी से राहत मिल सकती है।