जयपुर

Radio Collar: अब रेडियो कॉलर से लेपर्ड की रियल टाइम ट्रैकिंग, आबादी में घुसपैठ पर लगेगा तुरंत अलर्ट

wildlife conservation: झालाना लेपर्ड रिजर्व में हाईटेक निगरानी की तैयारी। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग का बड़ा प्रयोग इसी माह शुरू।
2 min read
• •
Updated: 4 Mar 2026, 7:28 PM IST
Feature image
Jhalana Leopard New Safari Track (Patrika Photo)

Leopard Tracking: जयपुर. राजधानी के जंगलों में अब वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। झालाना क्षेत्र से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंचने वाले लेपर्ड की बढ़ती गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वन विभाग ने रेडियो कॉलर लगाने की योजना तैयार की है। इस व्यवस्था से लेपर्ड की लोकेशन रियल टाइम में ट्रैक की जा सकेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और नियंत्रण संभव होगा।

झालाना लेपर्ड रिजर्व शहर की घनी आबादी से सटा हुआ है। यहां वर्तमान में करीब 40 लेपर्ड निवास कर रहे हैं। भोजन और क्षेत्र विस्तार की तलाश में कई बार ये लेपर्ड जंगल से बाहर निकलकर सिविल लाइंस, मालवीय नगर और अन्य कॉलोनियों की ओर बढ़ जाते हैं। बीते एक वर्ष में करीब एक दर्जन घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बना। ऐसे में वन विभाग ने आधुनिक तकनीक अपनाते हुए रेडियो कॉलर ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के अनुसार ट्रायल चरण में सबसे पहले उस लेपर्ड को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा, जिसकी मूवमेंट आबादी क्षेत्रों की ओर अधिक रहती है। कॉलर में लगे जीपीएस और ट्रांसमीटर के जरिए उसकी हर गतिविधि की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। जैसे ही कोई लेपर्ड बस्ती की ओर बढ़ेगा, अलर्ट सिस्टम तुरंत फील्ड स्टाफ को सूचना देगा। इससे समय रहते टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपाय कर सकेगी।

श्रेणीविवरण
क्या है रेडियो कॉलर?जीपीएस आधारित ट्रैकिंग डिवाइस
लेपर्ड की गर्दन में सुरक्षित रूप से लगाया जाता है
हर मिनट सटीक लोकेशन अपडेट देता है
कंट्रोल रूम से 24×7 निगरानी संभव
आपात स्थिति में तुरंत अलर्ट सिस्टम
मूवमेंट और व्यवहार का डेटा रिकॉर्ड करता है
क्यों जरूरी है यह कदम?आबादी क्षेत्रों में बढ़ती घुसपैठ
लोगों में दहशत और हादसों का खतरा
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगने वाला अधिक समय
समय रहते भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपाय संभव
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की प्रभावी पहल

वन अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रदेश में पहली बार की जा रही है। यदि प्रयोग सफल रहा तो अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी इसे लागू किया जाएगा। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि लेपर्ड को भी अनावश्यक खतरे से बचाया जा सकेगा।

तकनीक के उपयोग से वन्यजीव संरक्षण के इस नए मॉडल को जयपुर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और सह-अस्तित्व की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

Updated on:
4 Mar 2026, 7:28 PM IST
Published on:
Also Read
View All
राजस्थान में ‘विपक्षी’ कांग्रेस नहीं, अब ‘सत्ताधारी’ BJP उतरेगी सड़कों पर, प्रदेशभर में गरमाएगा राजनीतिक पारा, जानिए बड़ी वजह

पत्रिका ब्लॉकबस्टर सेल 25 अक्टूबर से- जयपुर के टॉप ब्रांड्स पर भारी छूट, साथ में मिलेंगे ढेरों बंपर प्राइज; ऐसे लें हिस्सा

Rajasthan Mining News: ‘राजस्थान में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी- सरकारी निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल’, जानिए क्या है बड़ी खबर?

Exclusive: महिला कोच में घुसने पर ₹2500 फाइन, लेकिन 72% ट्रेनों में कोच ही गायब! उत्तर पश्चिम रेलवे में महिलाओं के लिए बड़ी कमी

Rajasthan News: राजस्थान की भजनलाल सरकार का सख्त एक्शन, अब 27 भ्रष्ट आला अफसरों के खिलाफ चलेगा मुकदमा