
देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र माने जाने वाले बीकानेर हाउस में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी एक बड़े विवाद में आ गई है। पेशेवर फोटोग्राफर के रूप में अपनी पहचान बना चुके रेहान वाड्रा की इस सोलो प्रदर्शनी के दौरान प्रशासन द्वारा उनकी दर्जनों तस्वीरें हटाने के निर्देश दिए जाने के बाद कला जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई है। इस घटना के सामने आने के बाद जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी ने इसे कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है।
रेहान वाड्रा की इस सोलो फोटो प्रदर्शनी का शीर्षक 'नो आइडिया इज़ फाइनल' (No Idea Is Final) रखा गया था, जिसका आयोजन दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में होना तय था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन प्रदर्शनी के उद्घाटन से ठीक कुछ घंटे पहले प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप किया गया।
रेहान वाड्रा का आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी कुल कलाकृतियों में से 70 से अधिक तस्वीरों को हटाने का दबाव बनाया। इन हटाई गई तस्वीरों में मुख्य रूप से पिछले एक साल के दौरान देश की राजधानी में हुए युवाओं और 'जेन-ज़ी' पीढ़ी के विरोध प्रदर्शनों के दृश्य शामिल थे, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से जुड़े मार्च की तस्वीरें भी थीं।
रेहान के मुताबिक, अधिकारियों ने इन तस्वीरों के राजनीतिक संदर्भ और समय पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिनमें से दो तस्वीरों में भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा भी नजर आ रहा था।
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद बीकानेर हाउस प्रबंधन ने भी अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। प्रबंधन का कहना है कि संस्थान के कुछ नियम और दिशा-निर्देश तय हैं, जिनके तहत किसी भी प्रकार की राजनीतिक मैसेजिंग या संवेदनशील विषयों से जुड़ी सामग्री को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी जाती है। जिन तस्वीरों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी, वे उनकी गाइडलाइंस के दायरे में नहीं आ रही थीं, जिसके बाद ही उन्हें हटाने का अनुरोध किया गया था।
दूसरी ओर, इस घटना के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने इसे कलात्मक स्वतंत्रता का हनन और सेंसरशिप करार दिया है। वहीं, प्रियंका गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट साझा करते हुए अपने बेटे के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है।
नेहरू-गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले रेहान राजीव वाड्रा राजनीति के पारंपरिक रास्ते से अलग अपनी एक अलग रचनात्मक पहचान बना चुके हैं। वे कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के सुपुत्र हैं तथा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पौत्र हैं।
अपनी शुरुआती शिक्षा दून स्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम का रुख किया, जहां उन्होंने साल 2019 में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की। हालांकि पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक होने के बावजूद उन्होंने राजनीति के बजाय फोटोग्राफी और विजुअल आर्ट्स को अपने करियर के रूप में चुना। उन्हें महज सात साल की उम्र में वन्यजीव सफारी के दौरान उनकी माता द्वारा एक कैमरा गिफ्ट किया गया था, जिसके बाद से फोटोग्राफी के प्रति उनका रुझान लगातार बढ़ता चला गया।
दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की यह पहली बार कला प्रदर्शनी नहीं लगी है, बल्कि इससे पहले भी वे इस प्रतिष्ठित स्थल पर अपनी कलाकृतियों के प्रदर्शन कर चुके हैं:
डार्क पर्सेप्शन (Dark Perception - जुलाई 2021): यह उनकी पहली सोलो प्रदर्शनी थी, जिसे कला प्रेमियों द्वारा काफी सराहा गया था।
अनुमाना (Anumana - दिसंबर 2022): यह उनका दूसरा बड़ा विजुअल आर्ट शोकेस था।
उपमाना (Upamana - 2024): यह एक इमर्सिव विजुअल आर्ट प्रदर्शनी थी, जिसमें उनके आधुनिक फोटोग्राफी प्रयोगों को देखा गया था।
फिलहाल, उनकी ताजा प्रदर्शनी को लेकर उपजा यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और कला जगत में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि सार्वजनिक प्रदर्शनियों में राजनीतिक और सामाजिक विषयों की फोटोग्राफी की क्या सीमाएं होनी चाहिए।
बीकानेर हाउस नई दिल्ली के लुटियंस जोन में इंडिया गेट हेक्सागन (पंडारा रोड और शाहजहाँ रोड के बीच) के पास स्थित है। यह राजधानी का एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और कला केंद्र है। यह दिल्ली की अन्य आधुनिक आर्ट दीर्घाओं से बिल्कुल अलग है क्योंकि यह 8 एकड़ में फैला एक ऐतिहासिक शाही महल है, जिसका स्वामित्व राजस्थान सरकार के पास है।
इसका निर्माण 20वीं सदी की शुरुआत में (1929 में उद्घाटन) बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह के निवास के रूप में किया गया था। आजादी से पहले रियासतों के भारत में विलय को लेकर होने वाली कई महत्वपूर्ण बैठकें इसी परिसर में आयोजित हुई थीं।
ब्रिटिश वास्तुकार चार्ल्स जी. ब्लोमफील्ड द्वारा डिजाइन की गई यह इमारत पश्चिमी शैली और पारंपरिक राजपूत वास्तुकला (जैसे सुंदर छतरियां) का एक बेजोड़ मिश्रण है। लुटियंस दिल्ली के अन्य बड़े महलों (जैसे हैदराबाद हाउस या बड़ौदा हाउस) की तुलना में इसे एक भव्य और शांत शाही बंगले के रूप में डिजाइन किया गया था।