
जयपुर। राजस्थान के पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर सामने आया है। राज्य सरकार ने 235 सामान्य एवं पैरा खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें नौ खिलाड़ियों को पुलिस उप अधीक्षक (डीएसपी) बनाया जाएगा। इसके अलावा दो खिलाड़ियों को आबकारी विभाग में पेट्रोलिंग ऑफिसर और सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति मिलेगी। शेष 224 खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में लिपिक, कांस्टेबल, आबकारी सिपाही और उप जेलर सहित अन्य पदों पर नौकरी दी जाएगी।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में गुरुवार को शासन सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय समिति की सातवीं बैठक में ये निर्णय लिए गए। बैठक में सामान्य और पैरा खिलाड़ियों से प्राप्त 286 नए आवेदनों पर विचार किया गया। इनमें से 235 खिलाड़ियों के नियुक्ति प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इस फैसले से प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में आने का मौका मिलेगा।
नियुक्तियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-ए के तहत नौ खिलाड़ियों को डीएसपी पद पर नियुक्ति देने के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। वहीं, श्रेणी-बी में दो खिलाड़ियों को आबकारी विभाग में पेट्रोलिंग ऑफिसर और एसआई के पदों पर नियुक्ति मिलेगी।
सबसे ज्यादा नियुक्तियां श्रेणी-सी में स्वीकृत की गई हैं। इसके तहत 224 खिलाड़ियों को लिपिक ग्रेड-द्वितीय, कांस्टेबल, आबकारी विभाग में सिपाही एवं आबकारी आरक्षक और उप जेलर के पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। खास बात यह है कि इन 224 खिलाड़ियों में 73 पैरा खिलाड़ी भी शामिल हैं। यानी सरकार के इस फैसले से पैरा खेलों में उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ियों को भी सरकारी नौकरी का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार दिसंबर 2023 से अब तक 187 पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नियुक्तियां दे चुकी है। अब 235 नए नियुक्ति प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिलेगी। आउट ऑफ टर्न नियुक्ति का उद्देश्य खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना और उनकी उपलब्धियों के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
बैठक में वन विभाग में पहले से नियुक्त खिलाड़ियों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने खिलाड़ियों को सेवा के दौरान आ रही परेशानियों और उनके समाधान के लिए विभागीय कार्ययोजना पर विचार किया। इन खिलाड़ियों को नियमों में एक बार की छूट देने और जरूरत के अनुसार दूसरे विभागों में समायोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इससे वन विभाग में पदस्थापित खिलाड़ियों को राहत मिलने की उम्मीद है।