
राजस्थान में ब्यावर के तत्कालीन परिवहन निरीक्षक जल सिंह मीणा से जुड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण नेशनल हाईवे पर चलने वाले कमर्शियल वाहनों से की जाने वाली करोड़ों रुपये की संगठित मासिक अवैध वसूली का गंभीर मामला है। इस पूरे नेक्सस की पोल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी सर्विलांस और खुफिया विंग के जरिए खोली थी। अब इस केस में ताजा घटनाक्रम के तहत ACB ने इस संगठित वसूली गैंग के दो और मुख्य दलालों- जगजीत सिंह उर्फ जगत बन्ना और ऋषिराज सिंह राठौड़ को साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया है।
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) मुख्यालय के निर्देशों पर एसीबी जयपुर नगर तृतीय इकाई ने बड़ी कार्रवाई की है। ब्यावर के मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) जल सिंह मीणा व अन्य के खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में गहन अनुसंधान के बाद एसीबी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जगजीत सिंह उर्फ जगत बन्ना और ऋषिराज सिंह राठौड़ (निवासी जिला अजमेर) के रूप में हुई है।
एसीबी की टीम ने पुलिस अभिरक्षा में दोनों आरोपियों से उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और केस से जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में गहन पूछताछ की। साक्ष्यों की पुष्टि होने और विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7ए और भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धारा 61 (2) के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर दोनों आरोपियों को आज 11 अगस्त को एसीबी मामलों की विशेष अदालत, अजमेर में पेश किया गया।
इस साल जनवरी में, ACB की विजिलेंस विंग को खुफिया इनपुट मिले थे कि अजमेर, ब्यावर और केकड़ी जिलों से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा एक बड़ा अवैध वसूली रैकेट चलाया जा रहा है। इस पर कार्रवाई करते हुए ACB ने जनवरी 2026 में परिवहन निरीक्षक जल सिंह मीणा और उनके दलालों के ब्यावर, विजयनगर और अजमेर स्थित कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।
जांच में सामने आया कि ब्यावर के एक प्रसिद्ध होटल को इस काली कमाई को इकट्ठा करने और बांटने का मुख्य केंद्र बनाया गया था। दलाल दिनभर हाईवे से अवैध राशि बटोरते थे, जिसे बाद में यहां लाकर जल सिंह मीणा और सिंडिकेट के अन्य उच्च अधिकारियों (अजमेर RTO तक) में वितरित किया जाता था। जनवरी में हुई इस बड़ी कार्रवाई में जल सिंह मीणा सहित करीब 10 से 12 लोगों को पकड़ा गया था।
छापेमारी के दौरान जल सिंह मीणा के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नियम विरुद्ध अर्जित की गई काली कमाई, बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज और आय से अधिक संपत्ति के पुख्ता सबूत हाथ लगे थे, जिसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
दलालों के मार्फत ब्यावर-अजमेर हाईवे पर चलने वाले ओवरलोड व्यावसायिक वाहनों, ट्रक ऑपरेटरों और अवैध परिवहन करने वालों की एक विशेष लिस्ट तैयार की जाती थी। जिन वाहनों का नाम इस लिस्ट में शामिल होता था, उनसे एंट्री फीस/मंथली के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। बदले में जल सिंह मीणा और उनकी टीम उन गाड़ियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करती थी।
एकत्रित की गई पूरी रिश्वत की राशि मुख्य आरोपी जल सिंह मीणा तक पहुंचाई जाती थी, और इस काम को अंजाम देने वाले निजी दलालों को बकायदा फिक्स कमीशन दिया जाता था।
ब्यावर मोटर वाहन निरीक्षक जल सिंह मीणा से जुड़े इस भ्रष्टाचार प्रकरण में आगे की जांच और नेटवर्क का खुलासा करने के लिए एसीबी की टीम लगातार जुटी हुई है। यह कार्रवाई एसीबी उप महानिरीक्षक-द्वितीय (जयपुर) ओमप्रकाश मीणा के पर्यवेक्षण में संचालित की जा रही है।
प्रकरण का अग्रिम अनुसंधान एसीबी जयपुर नगर तृतीय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में किया जा रहा है। एसीबी की इस कार्रवाई से परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में संलिप्त अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।