राजस्थान की एएनटीएफ ने एसआइआर के जरिये कमाल दिखाते हुए पिछले 4 साल से फरार 25 हजार रुपए के इनामी अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्कर कैलाशचंद खाती पटेल (52) को दबोच लिया।
जयपुर। एसआइआर (सर) जहां बीएलओ के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है वहीं राजस्थान की एएनटीएफ ने एसआइआर के जरिये कमाल दिखाते हुए पिछले 4 साल से फरार 25 हजार रुपए के इनामी अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्कर कैलाशचंद खाती पटेल (52) को दबोच लिया। पुलिस ने एसआइआर की टीम बनकर परिवार से संपर्क साधा था।
आरोपी पिछले चार वर्षों से फरार था और NDPS एक्ट के चार प्रकरणों में वांछित था। एएनटीएफ को जानकारी मिली कि आरोपी को राजनीति में रुचि है और उसने दो जगह मतदाता सूची में नाम दर्ज करवा रखा है। एएनटीएफ टीम ने एसआइआर टीम का सदस्य बनकर परिवार से संपर्क साधा तो पता चला कि वह महीनों तक घर नहीं आता। टीम ने उसके नहीं मिलने पर दोनों जगह से मतदाता सूची से उसका नाम कट जाने की जानकारी दी। इस पर परिजन ने शाम को गांव से बाहर होटल पर उसके आने की सूचना दी। तब आरोपी को ऑपरेशन धरा-तुंडिका के तहत ट्रेस कर पकड़ा।
आइजी विकास कुमार ने बताया कि आरोपी कैलाश नीमच (एमपी) के अचलपुरा गांव का रहने वाला है और राजस्थान मध्यप्रदेश की सीमा पर सक्रिय तस्करों व अफीम उत्पादकों के बीच मध्यस्थ बन चुका था। उसकी कमाई का खेल दलालों पर टिका था। उत्पादनकर्ताओं से छोटी खेप लेकर बड़े तस्करों को सौंपता और हर डील पर कमीशन लेता था।
आरोपी कैलाश 2014 से तस्करी में लिप्त था। शुरुआत में थैले में डोडा पोस्त छिपाकर भेजता, बाकी सामान घरेलू रखता ताकि शक न हो। पुलिस की चैकिंग में उसकी गाड़ियां घरेलू सामान से लदी समझकर छूटती रहीं। इसी शातिर अंदाज के कारण 11 वर्षों में उसके खिलाफ सिर्फ चार प्रकरण दर्ज हो पाए, वह भी तब जब उसके साथ पकड़े गए दूसरे तस्करों ने उसका नाम उजागर किया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह महीने में सिर्फ तीन-चार बड़े सौदे करता था और एक-एक डील में 40 से 50 हजार रुपए तक कमा लेता था। उसके शब्दों में-चार दिन काम, बाकी ऐशो आराम। उसने स्वीकार किया कि कभी तस्करी को अपराध नहीं समझा और न ही पकड़े जाने का कोई पछतावा है।
जानकारी के अनुसार आरोपी मारवाड़, बाड़मेर-जैसलमेर सीमा, हरियाणा और पंजाब तक मादक पदार्थों की सप्लाई करवाता था। उसके नेटवर्क की जटिलता और धरती जैसे सख्त आवरण में छिपे तुंडिका' (घुसपैठ करने वाले की तरह) स्वरूप को देखते हुए इस टीम ने कार्रवाई का नाम धरा-तुंडिका रखा गया।