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- आर्यन शर्मा
जयपुर। शहर के पॉश इलाकों में से एक... वैशाली नगर। जहां ऊंची-बड़ी इमारतें, आलीशान घर और लोगों का सलीकेदार रहन-सहन देखकर लगता है कि यहां के लोग सुविधा सम्पन्न हैं। ऐसे में सोचा कि क्यों न झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में आने वाले इस पॉश इलाके में जाकर लोगों की नब्ज टटोली जाए कि क्या वाकई वे क्षेत्र के विकास से संतुष्ट हैं।
इस कड़ी में क्षेत्र के बीचोंबीच स्थित नर्सरी पार्क में दाखिल हुआ। यह वह जगह है, जहां हर समय लोगों की चहलकदमी रहती है। यहां कुछ लोग वॉकिंग ट्रैक पर टहल रहे थे तो कुछ युवा व किशोर जिम में कसरत कर अपनी सेहत सुधार रहे थे। वहीं कुछ युवा जोड़े बैंच पर बैठकर गुफ्तगू में मशगूल थे तो कुछ लोग समूह में बतिया रहे थे। ऐसे ही एक समूह के पास जाकर बैठ गया और उनकी बातों पर गौर करने लगा। वे अध्यात्म, समाज, सियासत सरीखे विभिन्न विषयों पर तर्क-वितर्क कर रहे थे। उन्हें यह बोलते सुना कि झूठे वादों से कोई चुनाव नहीं जीत सकता। ऐसा कोई नेता नहीं, जो इस देश की समस्याओं का समाधान निकाले। मौका देख कर उनसे पूछा कि क्षेत्र की राजनीति और विकास के बारे में आपके क्या खयालात हैं। तो इतने में सब एक साथ बोल पड़े, हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं। हम तो यहां अध्यात्म पर बात कर रहे हैं। लगा, यहां के लोग अपनी पीड़ा दबाए बैठे हैं। फिर उन्हें कुरेदा तो हालात को लेकर उनका गुस्सा फूट पड़ा। पीएचईडी में एक्सईएन रहे जय भगवान अग्रवाल कहने लगे, सरकार का स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है लेकिन देखिए, पार्क के चारों ओर कांट-छांट किए गए पेड़-पौधों की टहनियां और पत्ते पड़े हैं। कोई उठाने वाला ही नहीं। जगह-जगह कचरे के ढेर हैं।
चर्चा बढ़ी तो कुछ और लोग आकर अपनी बात रखने लगे। आरएसईबी कॉलोनी में निवासी होम्योपैथी डॉक्टर एस. के. जोशी बोले, राजनीतिक लोग निजी स्वार्थ के लिए काम करते हैं। आज एक पार्टी की सरकार है, हो सकता है कल दूसरी पार्टी की सरकार बने, पर लोगों की समस्याएं जस की तस रहने वाली हैं। इलाके में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। इन सबके बीच सबसे बड़ी समस्या यह है कि इलाके में कोई मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल नहीं है। बस, एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जहां छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज होता है। इतना बड़ा इलाका है, ऐसे में एक सैटेलाइट अस्पताल तो होना चाहिए। हर बार उम्मीद ही रहती है।
जब पूछा कि आप लोग इलाके की समस्या विधायक या किसी स्थानीय नेता के सामने नहीं रखते? इस पर सभी खफा भाव से कहने लगे, यहां के विधायक राजपाल सिंह शेखावत हैं और उनका सरकार में रसूख भी है लेकिन जनता के लिए वह किसी काम के नहीं। वह तो इलाके में आकर दर्शन ही नहीं देते। बस, आते तब ही हैं जब उन्हें किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माला पहननी होती है। सरकारी स्कूल से सेवानिवृत्त प्रिंसिपल गिर्राज भगवती बोले, चूंकि मैं शिक्षा से जुड़ा हूं तो मुझे यह बात बहुत अखरती है कि वैशाली नगर में कोई सीनियर सैकंडरी स्कूल ही नहीं है। आर्थिक रूप से सुदृढ़ लोग तो अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ा लेते हैं लेकिन यहां ऐसे भी लोग हैं जिनकी हैसियत अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूल में करवाने की नहीं है। उन्हें बच्चों को खातीपुरा, सोडाला व हीरापुरा स्थित सरकारी स्कूल में भेजना पड़ता है।
फिर कॉलोनियों और गलियों का हाल जानने के लिए वैशाली नगर पुलिस थाना के नजदीक गंगासागर-बी कॉलोनी में घुसा। वहां आवारा पशुओं का झुंड देखकर चौंक गया। तभी वहां के बाशिंदे पेशे से फैशन डिजाइनर रोहित कामरा कहने लगे, यही तो इस इलाके की वास्तविक तस्वीर है। इतना पॉश इलाका होने के बावजूद खुले में श्वान, गाय और अन्य आवारा पशु घूमते रहते हैं। कई मर्तबा शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। वैशाली नगर जयपुर के सबसे अच्छे इलाकों में से एक है लेकिन यहां किसी विदेशी या दिल्ली, मुंबई से आने वाले अपने दोस्त को लाने का मन ही नहीं करता। बातों ही बातों में नोटबंदी और जीएसटी का जिक्र छेड़ दिया तो वह बोले, पहले वाला दौर लौट कर आने में समय लगेगा।
यहां से निकल कर गुप्ता स्टोर चौराहे पर पहुंचा। वहां कुछ युवा बस का इंतजार कर रहे थे। उनके चेहरों पर इंतजार की घडिय़ां लंबी होने से परेशानी के भाव साफ झलक रहे थे। बातचीत के दौरान परिवहन सुविधा का जिक्र छेड़ा तो टोंक फाटक के एक कोचिंग संस्थान से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही दीपाक्षी सिंह तपाक से बोलीं, यहां से सिंधीकैंप, रेलवे स्टेशन, मालवीय नगर, टोंक फाटक जैसी प्रमुख जगहों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है।