जयपुर

राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: सीएम भजनलाल शर्मा बोले- जनप्रतिनिधि और जनता का विश्वास ही हमारे लोकतंत्र की असली ताकत

Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा' के समापन समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र, जनभागीदारी और सुशासन को मजबूत करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान-2047 का लक्ष्य जनहित, पारदर्शिता और सभी जनप्रतिनिधियों के सहयोग से ही साकार होगा।
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Updated: 15 Jul 2026, 5:58 PM IST
75 Years of Rajasthan Legislative Assembly
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Photo: @BhajanlalBjp )

75 Years of Rajasthan Legislative Assembly: जयपुर: राजस्थान के संसदीय इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। राजस्थान विधानसभा ने अपने गौरवशाली 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर विधानसभा परिसर में 'विधायी गौरव यात्रा: पूर्व एवं वर्तमान सदस्य समागम' का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ सत्र बेहद गरिमामयी रहा। लोकतंत्र, जनविश्वास और जनसेवा की इस अद्भुत यात्रा के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास का एक मील का पत्थर बताया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का अटूट विश्वास और जन-भागीदारी है। उन्होंने प्रदेश की जनता की उम्मीदों को साकार करने को सरकार और जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

लोकतंत्र और जनसेवा की समृद्ध परंपरा का अमृत महोत्सव

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज पूरा प्रदेश राजस्थान विधानसभा के गौरवशाली 75 वर्ष पूरे होने पर 'अमृत महोत्सव' मना रहा है। उन्होंने कहा, यह केवल 75 वर्षों का सफर नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिनिधियों की प्रतिबद्धता और जनसेवा की समृद्ध परंपरा का एक सशक्त प्रतीक है।

इस सदन ने हमेशा कानून निर्माण, जनहित के मुद्दों पर सार्थक विमर्श और सुशासन को मजबूत करने में देश के सामने एक आदर्श पेश किया है। सीएम ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि राजस्थान विधानसभा आज तकनीकी पारदर्शिता और जनभागीदारी का एक मजबूत उदाहरण बनकर देश की अन्य विधानसभाओं के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही है।

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और सांस्कृतिक नवाचार

संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा द्वारा किए गए नवाचारों की सराहना की। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजस्थान विधानसभा ने एक विशेष कैलेंडर और विशेष दैनिक 'नंदिनी' जारी किया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और सराहनीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना को लोकतांत्रिक परंपराओं से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम बनेगा।

इस कार्यक्रम के दौरान विधानसभा में पास किए गए कई ऐतिहासिक विधेयकों पर भी चर्चा हुई, जिनमें 23 विशेष रूप से महत्वपूर्ण विधायी उपलब्धियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने उन सभी पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को बधाई दी, जिन्होंने अपने विचारों, अनुभवों और जनसेवा से इस पवित्र सदन की गरिमा को लगातार बढ़ाया है।

'मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उद्देश्य हमेशा 'जनकल्याण'

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी का अंतिम उद्देश्य हमेशा जनकल्याण और प्रदेश का विकास ही होता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्कृति और आपसी संवाद राजस्थान की पहचान रही है और आगे भी रहेगी। सत्र के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि हमारे पूर्व जनप्रतिनिधियों के अनुभव और संसदीय परंपराएं हमारी लोकतांत्रिक विरासत को समृद्ध करने के साथ-साथ नई पीढ़ी के लिए एक महान प्रेरणास्रोत हैं।

'विकसित राजस्थान @ 2047' का संकल्प

मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके सफल नेतृत्व में आज देश 'विकसित भारत 2047' की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी तर्ज पर राजस्थान सरकार भी सुशासन, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और निरंतर संवाद की नीति पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र की प्राचीनता का जिक्र करते हुए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र कोई ब्रिटिश देन नहीं है, बल्कि हमारी जड़ें बेहद प्राचीन हैं। उन्होंने पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) का उदाहरण देते हुए बताया कि मौर्य काल में भी 30 लोगों द्वारा चुनी गई एक मुनिसिपल व्यवस्था और छह समितियां हुआ करती थीं, जो आज की संसदीय समितियों की तरह ही कार्य करती थीं।

इसके साथ ही सीएम भजनलाल शर्मा ने प्रशासनिक सुधारों और सामाजिक चुनौतियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे फाइलों पर नहीं की जगह हां कहने की कोशिश करें, ताकि जनकल्याण के कार्य बिना रुके आगे बढ़ सकें। सीएम ने सोशल मीडिया पर परोसी जा रही अनियंत्रित और अश्लील सामग्री पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर हमने अपनी सांस्कृतिक और नैतिक विरासत को नहीं बचाया, तो हमारी संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी। भारत तभी विश्व नेता बनेगा जब हमारे नैतिक मूल्य मजबूत होंगे।

जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रहरी

भाषण के अंत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बेहद भावुक लहजे में कहा कि जनता ने जिस आशा और विश्वास के साथ हमें सदन में भेजा है, उसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रहरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी साझा किया कि एक विधायक, मंत्री और स्पीकर के रूप में काम करने के कारण उन्हें संसदीय कामकाज का बेहद करीबी अनुभव है। उन्होंने सभी नव-निर्वाचित और पूर्व सदस्यों से अपील की कि वे राजस्थान की करोड़ों जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करते रहें।

'अनुभव और युवा ऊर्जा का यह अद्भुत समागम लोकतंत्र की असली पूंजी'

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों और पूर्व व वर्तमान सदस्यों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षों की यह विधायी गौरव यात्रा देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने अनुभव और युवा ऊर्जा के इस अभूतपूर्व समागम को लोकतंत्र की असली पूंजी बताते हुए कहा कि जब एक युवा विधायक का आधुनिक दृष्टिकोण बुजुर्ग विधायकों के दशकों लंबे विधायी और सामाजिक अनुभवों से मिलता है, तो संसदीय परंपराएं और अधिक परिपक्व व समृद्ध होती हैं। देवनानी ने सदन के यशस्वी अतीत को नमन करते हुए पूर्व व वर्तमान सदस्यों की जन-प्रतिबद्धता को सराहा, जिनके सकारात्मक विचार-विमर्श से राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।

देवनानी ने विधानसभा द्वारा जनहित में उठाए गए क्रांतिकारी कदमों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदन ने हमेशा जन-आकांक्षाओं को सर्वोपरि मानते हुए भूमि सुधार, पंचायती राज के सुदृढ़ीकरण और शिक्षा से जुड़े ऐतिहासिक एवं दूरगामी कानूनों का निर्माण किया है। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यप्रणाली में आधुनिकता के समावेश पर बल देते हुए कहा कि विधाई कार्यों में पारदर्शिता, गतिशीलता और जवाबदेही लाने के लिए 'ई-विधान' और 'पेपरलेस संस्कृति' की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने विधानसभा परिसर में स्थापित अत्याधुनिक डिजिटल म्यूजियम, संविधान दीर्घा और वंदे मातरम दीर्घा जैसे नवाचारों को नई पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शिका और लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बताया।

'संसदीय मर्यादाओं और स्वस्थ परंपराओं का केंद्र है यह सदन'

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान विधानसभा ने सदैव पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद की स्वस्थ परंपरा को जीवंत रखा है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र का यह सफर आज तकनीकी रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और अधिक उत्तरदायी विधायी व्यवस्था के रूप में सुस्थापित हो चुका है। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को अक्षुण्ण रखने में प्रत्येक कालखंड के सदस्यों का योगदान अतुलनीय रहा है।

'आम इंसान को सशक्त बनाने वाले कानूनों का उत्सव है यह महोत्सव'

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महोत्सव केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि राजस्थान के आम इंसान को सशक्त बनाने वाले जनहितैषी कानूनों का उत्सव है। उन्होंने सूचना के अधिकार एवं पंचायती राज जैसे प्रगतिशील कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा ने सदैव देश को नई दिशा दिखाई है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु सदन में बैठकों की संख्या बढ़ाने तथा प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिए जाने की आवश्यकता जताई, ताकि सदन की गरिमा सदैव सर्वोच्च बनी रहे।

एयरपोर्ट और विधानसभा पहुंचने पर लोकसभा अध्‍यक्ष का स्‍वागत

लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला का जयपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर राजस्‍थान विधानसभा अध्‍यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर स्‍वागत किया। राजस्‍थान विधानसभा पहुंचने पर विधानसभा अध्‍यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्‍यमंत्री भजनलाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने लोकसभा अध्‍यक्ष का पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर स्‍वागत किया।

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15 Jul 2026, 5:58 PM IST
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