
राजस्थान की राजनीति में शहरी निकाय चुनावों की गर्माहट ठंडी होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने अब अपने अगले बड़े राजनीतिक लक्ष्य 'मिशन पंचायत' की तैयारियां पूरी ताकत से शुरू कर दी हैं। राज्य में चुनावों की आचार संहिता हटने के बाद से ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। वे लगातार ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं और लगभग पूरे प्रदेश को नापते हुए हर दिन अलग-अलग जिलों में पहुंच रहे हैं। इन दौरों के दौरान जहां एक तरफ करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे और खुले मंच से बैठकें कर आगामी ग्रामीण चुनावों की जमीन तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने इसी व्यस्त और ताबड़तोड़ दौरों के सिलसिले के तहत आज यानी सोमवार को भरतपुर और खैरथल-तिजारा जिले के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वे दोनों जिलों में पहुंचकर स्थानीय जनता को करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की सौगात देंगे।
आधिकारिक कार्यक्रमों के अनुसार, मुख्यमंत्री सबसे पहले भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के बिड्यारी गांव में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। यहां वे विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके तुरंत बाद उनका काफिला खैरथल-तिजारा जिले के लिए प्रस्थान करेगा, जहां वे विकास परियोजनाओं की सौगात देने के साथ आमजन और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह दौरा किसी एक दिन का नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से एक सुनियोजित मैराथन अभियान की तरह चल रहा है। उनके पिछले कुछ दिनों के शेड्यूल पर नजर डालें तो राजनीतिक सक्रियता काअंदाजा साफ लगाया जा सकता है:
27 सितंबर (रविवार): मुख्यमंत्री ने सूरतगढ़ का दौरा कर आम जनता और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी।
26 सितंबर (शनिवार): उन्होंने प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों का दौरा कर स्थानीय विकास कार्यों की समीक्षा की थी।
24 सितंबर (गुरुवार): एक ही दिन में बीकानेर और ब्यावर-जैतारण का दौरा कर कई सौगातें दी थीं।
संभावित दौरा: आगामी 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री का जैसलमेर दौरा भी प्रस्तावित है, जिससे यह साफ है कि सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच बनाने पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इन दौरों के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, जनता के बीच जाकर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना और अटके हुए विकास कार्यों को गति देना। दूसरा, और सबसे अहम पहलू यह है कि इन सभी दौरों के दौरान मुख्यमंत्री स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ अलग से बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में निकाय चुनावों के अनुभवों से सीख लेते हुए आगामी पंचायती राज और जिला परिषद चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति तैयार की जा रही है।
शहरी निकायों में मिली सफलता के बाद अब बीजेपी का पूरा जोर ग्रामीण मतदाताओं को अपने पाले में बनाए रखने पर है। मुख्यमंत्री के इन ताबड़तोड़ दौरों, ताबड़तोड़ शिलान्यास और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद ने यह साबित कर दिया है कि राजस्थान की सियासत में आराम का कोई वक्त नहीं है। सरकार जनता के बीच रहकर विकास के मुद्दों को धार दे रही है, ताकि आने वाले पंचायत चुनावों में पार्टी को एक मजबूत और अजेय बढ़त मिल सके।