जयपुर

राजस्थान में अब BJP V/S RLP से गरमाया सियासी पारा- Congress मूकदर्शक, जानें विवाद की असल जड़ क्या?

राजस्थान में भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बीच जुबानी जंग तेज। हनुमान बेनीवाल के हमलों और मदन राठौड़ के बयानों के बीच कांग्रेस बनी मूकदर्शक।
3 min read
• •
Updated: 30 May 2026, 9:01 AM IST
Rajasthan BJP RLP Clash Hanuman Beniwal Madan Rathore Statement Update
Madan Rathore, Hanuman Beniwal, Govind Singh Dotasra

राजस्थान में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बीच का राजनैतिक विवाद अब पूरी तरह से खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ चुका है। आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल द्वारा कानून व्यवस्था, किसानों के मुद्दों और स्थानीय प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद से ही दोनों दलों के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बीच जो सबसे हैरान करने वाला पहलू सामने आ रहा है, वह है मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का पूरी तरह से शांत रहना। बीजेपी और आरएलपी के बीच हो रहे इस राजनीतिक दांव-पेंच के दौरान कांग्रेस पार्टी एक 'मूकदर्शक' की भूमिका निभाती हुई नजर आ रही है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि जाट बाहुल्य क्षेत्रों और ग्रामीण राजस्थान में अपनी सियासी जमीन को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों ही दल इस वक्त अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे प्रदेश का राजनीतिक वातावरण गरमा गया है।

'टकराव' की ये है मुख्य वजह

राजस्थान में भाजपा (BJP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बीच अचानक टकराव की मुख्य वजह आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार पर दिया गया एक विवादित बयान है। इस बयानबाजी के बाद दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया है और इसी वजह से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को विरोध का सामना करना पड़ा है।

सांसद हनुमान बेनीवाल का विवादित बयान

जयपुर के पास दूदू जिले के भैराणा धाम में चल रहे एक आंदोलन के दौरान एक महापंचायत का आयोजन किया गया था। इस सभा को संबोधित करते हुए नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनके पूरे मंत्रिमंडल के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं से परे जाकर अत्यंत तीखी और अमर्यादित शब्दावली का इस्तेमाल किया।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का पलटवार

बेनीवाल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि राजनेताओं का शब्दकोश खत्म हो चुका है और वे सोशल मीडिया पर टीआरपी (TRP) और सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की घटिया और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं का हवाला देते हुए मीडिया और जनता से अपील की कि "ऐसे हल्के स्तर के शब्दों का प्रयोग करने वाले नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए तभी इनकी अक्ल ठिकाने आएगी।"

सड़क पर उतरा 'टकराव'

मदन राठौड़ द्वारा हनुमान बेनीवाल के खिलाफ दिए गए "सामाजिक बहिष्कार" और "अक्ल ठिकाने लगाने" वाले बयान को आरएलपी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता का अपमान माना। इसी के विरोध में आरएलपी समर्थकों और छात्र नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा।

कुचामन (डीडवाना-कुचामन) में कार रोकना: भाजपा के एक संगठनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने कुचामन पहुंचे मदन राठौड़ के काफिले को आरएलपी कार्यकर्ताओं ने अचानक बीच सड़क पर घेर लिया। कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के आगे आकर काले झंडे दिखाए, सरकार विरोधी नारे लगाए और तख्तियां दिखाकर भारी विरोध जताया। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) के बाहर प्रदर्शन: जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर आरएलपी कार्यकर्ताओं और छात्र संघ से जुड़े युवाओं ने मदन राठौड़ के 'अहंकारपूर्ण और अमर्यादित' बयान के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। युवाओं ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। आरएलपी का कहना है कि यह उनका लोकतांत्रिक विरोध था और वे स्वाभिमान की लड़ाई सड़क पर लड़ते रहेंगे।

'मूकदर्शक' क्यों बनी हुई है कांग्रेस पार्टी?

इस पूरे सियासी टकराव के दौरान राजस्थान विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस पार्टी का पूरी तरह शांत रहना राजनैतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर सरकार के खिलाफ होने वाले किसी भी बड़े प्रदर्शन में कांग्रेस तुरंत कूद पड़ती है, लेकिन आरएलपी के इस आंदोलन से कांग्रेस ने एक सोची-समझी दूरी बना रखी है।

राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की इस 'मूकदर्शक' भूमिका के पीछे एक बहुत बड़ी और गहरी रणनीतिक योजना छिपी हुई है। कांग्रेस जानती है कि भाजपा और आरएलपी के बीच होने वाले इस सीधे टकराव से अंततः सत्ताधारी दल विरोधी वोट बैंक बिखरने के बजाय आरएलपी और कांग्रेस के बीच बंट सकता है, या फिर दोनों दलों की आपसी लड़ाई से भाजपा कमजोर हो सकती है। इसके अलावा पूर्व में आरएलपी के साथ हुए गठबंधनों और राजनैतिक अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस इस बार 'वेट एंड वॉच' की नीति पर चल रही है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ा 'वार-पलटवार'

भाजपा और आरएलपी के बीच का यह कड़ा मुकाबला केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी पूरी तरह से हावी हो चुका है। एक्स (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दोनों ही पार्टियों के आधिकारिक आईटी विंग और जमीनी समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ तीखे मीम्स, पुराने बयानों के वीडियो और राजनीतिक पोस्ट साझा कर रहे हैं।

हनुमान बेनीवाल के समर्थक जहां सरकार की प्रशासनिक विफलताओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हैशटैग चला रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक मदन राठौड़ के बयानों और सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए जनकल्याणकारी फैसलों के आंकड़ों को प्रस्तुत कर आरएलपी को आड़े हाथों ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर छिड़ी यह जंग मरुधरा के युवाओं के बीच इस राजनैतिक विवाद को और ज्यादा हवा दे रही है, जिससे इस खबर की डिजिटल पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है।

Updated on:
30 May 2026, 9:01 AM IST
Published on:
Also Read
View All
Exclusive: मंत्री-अफसरों की खींचतान में फंसा 72 करोड़ का बजट, राजस्थान के 53 हजार स्कूलों में बच्चे पुराने बर्तनों में खाने को मजबूर

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: पहले चरण के बाद भाजपा-कांग्रेस ने तेज की चुनावी रणनीति, दोनों ही दलों ने झोंकी ताकत

Rajasthan Panchayat Election: ‘पंचायत टिकटों के मालिक हैं विधायक, संगठनों-कार्यकर्ताओं के ताले लगा दो’, टिकट वितरण पर भड़के कांग्रेस नेता सीताराम लांबा

Bikaner House News: अचानक क्यों सुर्ख़ियों में है रॉबर्ट-प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा का ‘बीकानेर हाउस’ विवाद?

Rajasthan Accident: राजस्थान में दौसा-मनोहरपुर नेशनल हाईवे पर भीषण हादसा, गहरी खाई में गिरी कार, 4 श्रद्धालुओं की मौत