
Rajasthan BJP : राजस्थान में विभिन्न बोर्ड, आयोग, निगम, प्राधिकरण, अकादमी और समितियों में लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को लेकर कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार ने संभावित नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है। अब इन नामों पर अंतिम सहमति के बाद जल्द ही नियुक्तियों की घोषणा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार संभावित नामों के चयन में संगठन की राय भी ली गई है।
क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सूची तैयार की गई। इस सूची में उन नेताओं के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो पिछले कुछ समय में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके अलावा लंबे समय से संगठन में सक्रिय और विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने वाले नेताओं को भी अवसर दिए जाने की चर्चा है। अब तक राजस्थान सरकार करीब 12 महत्वपूर्ण नियुक्तियां कर चुकी है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि राजस्थान की राजनीति में यह परंपरा रही है कि सरकार के ढाई से तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से संगठन और सत्ता के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया जाता है। भाजपा सरकार भी अब अपने कार्यकाल के मध्य बिंदु को पार कर चुकी है, इसलिए कई महत्वपूर्ण पदों पर जल्द नियुक्तियां होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में लोकायुक्त समेत कई महत्वपूर्ण संस्थाओं और आयोगों के शीर्ष पद खाली पड़े हैं। पूर्व में कुछ आयोगों में नियुक्तियों में देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी अपने कार्यकाल में 70 से अधिक नेताओं को विभिन्न बोर्ड, आयोग, निगम, अकादमियों और अन्य संस्थानों में नियुक्तियां दी थीं। इनमें 4 नेताओं को कैबिनेट मंत्री और 31 से अधिक को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। इन पदों के अलावा कई को तो नियुक्तियां विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दी गई थीं, जिससे कुछ तो चुनाव आचार संहिता लगने के चलते कार्यभार तक नहीं संभाल सके थे।
हाल ही में 20 जून को प्रोफेसर संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को आरपीएससी सदस्य तथा हनुमान सिंह राठौड़ को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पहले राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अरुण चतुर्वेदी की नियुक्ति अगस्त 2025 में हुई थी।