जयपुर

Rajasthan Crime: 6.80 करोड़ का ‘बॉस स्कैम’, कमीशन पर बैंक खाता देने वाला बाड़मेर से गिरफ्तार

6.80 करोड़ रुपए के 'बॉस स्कैम' में साइबर पुलिस ने बाड़मेर से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता गिरोह को उपलब्ध कराया था। जांच में पता चला कि ठगी की रकम को म्यूल खातों में घुमाने के बाद क्रिप्टो में बदलकर आगे भेजा जाता था।
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Updated: 10 Sep 2026, 10:32 PM IST
boss scam
Boss Scam: गिरफ्तार आरोपी तगाराम (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान के चर्चित 6.80 करोड़ रुपए के 'बॉस स्कैम' मामले में साइबर पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस ने बाड़मेर निवासी तगाराम को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक गिरोह के आठ आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।

एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच के दौरान तगाराम की भूमिका सामने आई थी। तकनीकी जांच और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने बाड़मेर पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए जयपुर लेकर आई।

कमीशन के लालच में दिया था खाता

जांच में सामने आया कि तगाराम ने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता गिरोह के सदस्य हरेंद्र उर्फ हनी को उपलब्ध कराया था। इसी खाते में 24 अगस्त 2026 को साइबर ठगी के 2.50 लाख रुपए जमा हुए थे। पुलिस के अनुसार, रकम निकालने के लिए तगाराम खुद हरेंद्र के साथ बैंक पहुंचा था। बैंक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसकी भूमिका की पुष्टि की।

टेलीग्राम से चलता था खातों का नेटवर्क

डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से फर्जी और म्यूल बैंक खातों के साथ-साथ सिम, एटीएम और पासबुक किट की व्यवस्था करता था। साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग की जाती थी, ताकि मूल स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

रकम घुमाने के क्रिप्टोकरेंसी में बदलता था गिरोह

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम को एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और डिजिटल वॉलेट के जरिए अलग-अलग खातों में भेजता था। कई स्तरों पर रकम घुमाने के बाद इसे यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। पुलिस के मुताबिक इसके लिए बाइनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम के जरिए उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था।

मनी ट्रेल खंगाल रही साइबर पुलिस

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की मनी ट्रेल खंगालने में जुटी है। आरोपियों के वॉट्सऐप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।

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यह कार्रवाई डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन राजस्थान जयपुर के थानाधिकारी एवं डीएसपी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार, हेड कांस्टेबल बृजलाल और कांस्टेबल सच्चिदानंद शामिल रहे।

Updated on:
10 Sep 2026, 10:32 PM IST
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