11 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश : चिल्ड्रेन होम से निकले बालिगों को सरकारी नौकरियों व शिक्षा में 1 फीसदी आरक्षण दे सरकार

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र व प्रदेश सरकार को ‘केयर लीवर्स’ को नौकरी व शिक्षा में 1 फीसदी आरक्षण देने का आदेश दिया है। साथ ही 5 लाख रुपए तक ब्याज-मुक्त ऋण भी देने को कहा है। साथ में 12 सप्ताह में नीति बनाने व अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं।
2 min read
Google source verification
ग्वालियर हाईकोर्ट की दतिया राज परिवार की संपत्तियों की खरीद- बिक्री पर रोक

ग्वालियर हाईकोर्ट की दतिया राज परिवार की संपत्तियों की खरीद- बिक्री पर रोक : image credit- patrika enhanced AI Grok

Rajasthan High Court : जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने चिल्ड्रेन होम और बाल देख-रेख संस्थानों से 18 वर्ष की आयु पूरी कर बाहर निकलने वाले 'केयर लीवर्स' के पुनर्वास, शिक्षा और आजीविका के लिए महत्त्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे केयर लीवर्स को सरकारी नौकरियों, सार्वजनिक रोजगार, अनुबंध-कार्यों तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों में 1 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए 12 सप्ताह के भीतर नीति बनाएं और अधिसूचित करें। तब तक अंतरिम राहत के रूप में राज्य सरकार सभी सरकारी चयन प्रक्रियाओं में केयर लीवर्स को आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट और आवेदन व परीक्षा शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान करे। इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार, स्टार्टअप और आवास के लिए 5 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता या ब्याज-मुक्त ऋण देने के भी आदेश दिए गए हैं।

केयर लीवर्स सचिवालय बनेंगे

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत और राज्य स्तर पर प्रत्येक जिले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन 'केयर लीवर्स सचिवालय' का गठन किया जाएगा। केंद्र में इसका नेतृत्व कम से कम संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी करेगा। जिला स्तर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी, एक समर्पित आफ्टरकेयर अधिकारी और बाल अधिकार क्षेत्र से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे।

तैयार होगा डिजिटल डेटाबेस

सचिवालय चिल्ड्रेन होम छोड़ने वाले हर बच्चे का एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगा। संस्था छोड़ने से पहले 17.5 वर्ष की उम्र से ही पहचान पत्र (जैसे- पहचान दस्तावेज, पैन, बैंक खाता आदि) बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। बिना आफ्टरकेयर आईडी कार्ड के किसी भी बच्चे को संस्थान से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

राज्य सरकार एक 'केयर लीवर शिक्षा और स्कॉलरशिप फंड' बनाएगी। इसके तहत उच्च शिक्षा के लिए न्यूनतम 4,000 रुपए प्रति माह और प्रोफेशनल कोर्स के लिए 6,000 रुपए प्रति माह की स्कॉलरशिप के साथ हॉस्टल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

राज्य व संभाग स्तर पर विशेष निकाय

अदालत ने नीति निर्माण व निगरानी के लिए 30 दिनों के भीतर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'राज्य बाल न्याय परिषद' और प्रत्येक राजस्व संभाग स्तर पर संभागीय आयुक्त व वरिष्ठतम जिला जज की सह-अध्यक्षता में 'संभागीय बाल न्याय आयोग' गठित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए याचिका को लंबित रखा है।

राज्य के मुख्य सचिव, गृह, चिकित्सा एवं सामाजिक न्याय विभाग के सचिवों तथा अन्य हितधारकों को 8 सप्ताह के भीतर अनुपालना शपथ-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर 2026 को तय की गई है।