विधानसभा से पारित जनहित के छह कानून लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। कोचिंग सेंटर नियमन, स्वास्थ्य का अधिकार, गिग वर्कर्स और न्यूनतम आय गारंटी जैसे अहम कानून नियम न बनने से ठंडे बस्ते में हैं। पूर्व अफसरों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
Rajasthan Budget 2026: जयपुर: विधानसभा के आने वाले बजट सत्र के लिए नए विधेयकों की तैयारी चल रही है। जबकि सीधे तौर पर जनहित से जुड़े विधानसभा से पारित करीब छह विधेयक कानून का रूप लेने के बावजूद ठंडे बस्ते में पड़े हैं।
बता दें कि इनमें कोचिंग सेंटरों के रेग्युलेशन से संबंधित कानून और तीन साल पहले बना राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार कानून भी शामिल हैं। इनके अलावा एक कानून ऐसा भी है, जो 10 साल से फाइलों में बंद है। जो छह विधेयक कानून बनने के बावजूद जनता को लाभ नहीं दे पा रहे हैं, उनमें से एक वसुंधरा राजे सरकार के समय का है और तीन अशोक गहलोत सरकार के समय के हैं।
इनके अलावा दो कानून मौजूदा सरकार के कार्यकाल के हैं। इन कानूनों के विधेयक तत्कालीन सरकारों ने बहुमत से विधानसभा से पारित करवाए। लेकिन लगता है सरकारें इनके प्रभावी होने की तारीख तय करना ही भूल गईं।
क्यों आया- ऐसे लोगों को मुकदमेबाजी से रोकना, जो अनावश्यक या परेशानी उत्पन्न करने के लिए कोर्ट का सहारा लेते हैं। इससे कोर्ट का समय भी बर्बाद होता है।
क्यों आया- हर प्रदेशवासी को स्वास्थ्य का अधिकार मिले, जिससे सभी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्रदान करने की संविधान की भावना पूरी हो सके।
क्यों आया- प्रदेशवासियों को मजदूरी या सामाजिक सुरक्षा पेंशन की गारंटी के रूप में न्यूनतम आय की गारंटी प्रदान करने का हक दिया जाए।
क्यों आया- गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा दी जाए, जिससे वे संरक्षित महसूस कर सकें और उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
ॉक्यों आया- कोचिंग संस्थानों का पंजीयन कर उनका नियमन किया जाए, जिससे उनमें विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें। विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य व करियर के लिए मार्गदर्शन मिल सके, जिससे पढ़ाई के दौरान उनका तनाव कम हो सके।
कानून क्यों आया- प्रदेश में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इस गिरावट को रोकने के लिए घरेलू और कृषि उपयोग को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए भूजल उपयोग की अनुमति के लिए प्राधिकरण बनेगा, जिसकी अनुमति के बिना भूजल दोहन नहीं हो सकेगा।
कानून बनता है तो उसे आगे ले जाना भी उसी सरकार की जिम्मेदारी है। कानून लागू नहीं होने से सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़ा होता है।
-इंद्रजीत खन्ना, पूर्व मुख्य सचिव
मैंने तो ऐसी स्थिति अपने कार्यकाल में नहीं देखी। कानून बने और लागू नहीं हो, यह ठीक नहीं।
-अरुण कुमार, पूर्व मुख्य सचिव
कानून बनने के बाद नियम नहीं बनने से वे लागू नहीं हो पाते। लोकतंत्र में यह स्थिति ठीक नहीं है। लोगों को ऐसे मुद्दों पर आगे आना चाहिए। विधेयक विधानसभा से पारित होता है, ऐसे में सत्ता में जो भी सरकार हो, कानून लागू कराना उसकी जिम्मेदारी है।
-डॉ. सीपी जोशी, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान विधानसभा