
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई राजस्थान कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक में कर्मचारियों, मजदूरों, किसानों और उद्योग क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद कानून मंत्री जोगाराम पटेल, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य मजदूरी संहिता-2026 लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत मजदूरों का वेतन अब साल में दो बार बढ़ाया जाएगा और लगातार पांच घंटे काम कराने के बाद आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा।
कैबिनेट ने राज्य मजदूरी संहिता-2026 को मंजूरी देते हुए न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का फैसला किया है। नए प्रावधानों के अनुसार मजदूरों के वेतन में हर वर्ष 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को संशोधन किया जाएगा। साथ ही सभी नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) देना भी अनिवार्य होगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी मजदूर से सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही काम लिया जा सकेगा। इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी लगातार पांच घंटे काम करता है तो उसे कम से कम 30 मिनट का ब्रेक देना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।
कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राज्य बीमा योजना में भी अहम बदलाव किया है। अब कर्मचारियों को राज्य बीमा योजना का लाभ उनकी सेवानिवृत्ति की अंतिम तिथि तक मिलेगा। पहले यह सुविधा केवल सेवानिवृत्ति वाले वर्ष की 1 अप्रैल तक ही उपलब्ध रहती थी। नए फैसले से हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैठक में एग्रो फूड प्रोसेसिंग नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई। इस नीति का उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाना तथा किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करना है। फल-सब्जी, दलहन, तिलहन, औषधि निर्माण और पशु आहार से जुड़े उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। नई एग्रो इंडस्ट्री स्थापित करने वाले निवेशकों को विभिन्न प्रकार की रियायतें और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
कैबिनेट ने 'ट्री आउटसाइड पॉलिसी' को भी मंजूरी प्रदान की। मिशन हरियालो राजस्थान के तहत हर वर्ष 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत नदियों, नालों, सड़क किनारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस अभियान से पर्यावरण संरक्षण के साथ हरित क्षेत्र का विस्तार भी होगा।