पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच CM भजनलाल शर्मा की अनूठी पहल, लग्जरी काफिला छोड़ इलेक्ट्रिक कार से पहुँचे होटल। सादगी और बचत का दिया बड़ा संदेश। जानें पूरी खबर।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी सादगी और 'आम आदमी' छवि के लिए जाने जाते हैं। शुक्रवार को उन्होंने इसे एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सबको चौंका दिया। आज जब पूरे देश और प्रदेश में ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा हो रही है, तब मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से निकलने के लिए अपने पारंपरिक भारी-भरकम पेट्रोल-डीजल वाले काफिले के बजाय एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को चुना।
मुख्यमंत्री को जयपुर के एक होटल में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। आमतौर पर मुख्यमंत्री का काफिला दर्जनों गाड़ियों और सुरक्षा घेरे के साथ निकलता है, लेकिन आज नजारा अलग था।
सीएम भजनलाल शर्मा ने अपनी नियमित गाड़ी को छोड़कर इलेक्ट्रिक कार की सीट संभाली, और वो भी वीआईपी की तरह पीछे की सीट पर बैठकर नहीं, बल्कि ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठकर।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के अनुरूप मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और सादगी की बात कही थी।
यह कोई पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने फिजूलखर्ची रोकने की कोशिश की हो। पदभार संभालने के बाद से ही वे सादगी के हितेषी रहे हैं।
गाड़ियों की संख्या: सीएम पहले ही अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या को कम करने के निर्देश दे चुके हैं।
ट्रैफिक को राहत: उन्होंने सुरक्षा के नाम पर आम जनता को होने वाली ट्रैफिक की परेशानी को कम करने के भी आदेश दिए हैं।
अधिकारियों को हिदायत: मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों से भी आह्वान किया है कि वे वाहनों के उपयोग में मितव्ययिता बरतें और सरकारी कार्यक्रमों में सादगी का ध्यान रखें।
एनर्जी कॉन्क्लेव में पहुँचकर मुख्यमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ते तेल संकट और पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए अब हमें इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ना ही होगा। खुद उदाहरण पेश कर मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 'बचत' की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोग सीएम की इस पहल को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से भी जोड़कर देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बिना बोले यह संदेश दे दिया है कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का ही है और सरकार संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत को देखते हुए शासकीय कार्यक्रमों की संख्या में कटौती की जाए और जहाँ संभव हो, वहाँ वर्चुअल मीटिंग्स या कम संसाधनों का उपयोग किया जाए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी अपने क्षेत्र में काफिले घटाने की अपील की है।