जयपुर

राजस्थान में 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, फिर खाते खाली! बुजुर्ग दम्पती से ठगे 2 करोड़ रुपए

फोन की घंटी बजी और शुरू हुआ ऐसा डरावना सिलसिला, जो करीब 20 दिन तक चला। साइबर ठगों ने खुद को पुलिस, एटीएस, एनआइए और आरबीआई के अधिकारी बताकर जयपुर निवासी बुजुर्ग दम्पती को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
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Oct 03, 2026
Digital Arrest Cyber Fraud
आरोपी राजूराम और रतनाराम। फोटो: पत्रिका

जयपुर। फोन की घंटी बजी और शुरू हुआ ऐसा डरावना सिलसिला, जो करीब 20 दिन तक चला। साइबर ठगों ने खुद को पुलिस, एटीएस, एनआइए और आरबीआई के अधिकारी बताकर जयपुर निवासी बुजुर्ग दम्पती को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने और बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन का भय दिखाकर उनसे 2 करोड़ रुपए से अधिक की रकम अलग-अलग खातों में जमा करवा ली।

17 अगस्त को एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को पुलिस निरीक्षक बताया और दम्पती के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद कथित एटीएस अधिकारियों से वीडियो कॉल कराई गई। आरोपियों ने दावा किया कि दम्पती का नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वालों की सूची में है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया।

ठगों ने वॉट्सऐप पर भेजे फर्जी प्रमाण पत्र

ठगों ने बुजुर्ग दम्पती का विश्वास जीतने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम और पदों का इस्तेमाल किया। आरोपियों ने वॉट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और कथित बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजे, ताकि उनकी बातों पर संदेह न हो। सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर दम्पती पर दबाव बनाया गया और उन्हें ठगों के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।

इनके खातों में पहुंची ठगी की रकम

मामले की जांच में ठगी की रकम जिन खातों में पहुंची, उनमें बीकानेर निवासी राजूराम उर्फ राजेश और रतना राम के खाते भी मिले। पुलिस के अनुसार राजूराम ने खाता, चेकबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया और उसके खाते में आए 1.50 लाख रुपए निकालकर सुनील को दिए। इसके बदले उसे 15 हजार रुपए मिले। वहीं रतना राम के खाते से 24 सितंबर को दो चेकों के जरिए कुल 8.10 लाख रुपए निकाले गए।

पुलिस के अनुसार यह रकम भी सुनील को दी गई और खाते के बदले रतना राम को 7,500 रुपए मिले। दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जांच आगे बढ़ा दी है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए निकालने के लिए खाताधारकों का इस्तेमाल किया गया। खाते, चेकबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराने के बदले कमीशन दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।

Updated on:
03 Oct 2026 07:56 am
Published on:
03 Oct 2026 07:56 am