राजस्थान में लर्निंग आउटकम सुधारने और ड्रापआउट कम करने को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला किया है। अब 5वीं और 8वीं की परीक्षा में भी बच्चों को फेल किया जाएगा।
जयपुर। राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में पांचवीं और आठवीं कक्षा में अब ऑटोमेटिक प्रमोशन व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। दोनों कक्षाओं में अब न्यूनतम अंक लाने पर ही अगली कक्षा में छात्र को प्रमोट किया जाएगा। वहीं, अगर छात्र कक्षाओं में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें तुरंत फेल नहीं माना जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों को 45 दिन से दो महीने का विशेष शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) दिया जाएगा। इसके बाद उनकी दोबारा परीक्षा ली जाएगी। दूसरी परीक्षा में सफल होने पर ही छात्र को छठी और नौवीं कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।
दरअसल, राजस्थान में शिक्षा विभाग ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) में संशोधन किया है। इसके तहत ऑटोमेटिक प्रमोशन व्यवस्था बंद की गई है। नए नियम सत्र 2026-27 से लागू होंगे। इससे पहले पांचवीं कक्षा में ऑटोमेटिक प्रमोशन व्यवस्था लागू थी। न्यूनतम अंक लाने का प्रावधान आठवीं कक्षा में ही लागू था, अब दोनों कक्षाओं में यह लागू कर दिया गया है।
नए नियमों के तहत अगर निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चे फेल होते हैं तो सरकार की ओर से उन्हें पुन: फीस देकर उसी कक्षा में पढ़ाया जाएगा। शिक्षा विभाग निजी स्कूलों से बच्चों के फेल होने का कारण भी पूछेगा। इसके अलावा किसी भी सरकारी स्कूल और आरटीई के तहत पढ़ने वाले निजी स्कूल के छात्र को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा।
विभाग का तर्क है कि ऑटो प्रमोशन के कारण बच्चों में पढ़ाई को लेकर गंभीरता कम हो गई थी। नई व्यवस्था के तहत बिना न्यूनतम योग्यता के आगे बढ़ने की छूट नहीं मिलेगी। 5वीं कक्षा में पास होने के लिए अब हर विषय में कम से कम 32 अंक जरूरी होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के लर्निंग आउटकम सुधारना और उनके रिजल्ट को बेहतर बनाना है।
अधिकारियों का तर्क है कि प्रमोट करने से छात्र छठवीं और नौवीं कक्षा में तो आ जाते हैं, लेकिन कमजोर होने के बाद आगे की कक्षाओं में पास नहीं होते। ऐसे में वे ड्रापआउट हो जाते हैं। सबसे अधिक समस्या छात्राओं को होती है।
नई व्यवस्था से छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों की भी अकाउंटेबिलिटी तय होगी। अब अभिभावकों को ये देखना होगा कि बच्चा पढ़ रहा है या नहीं, होमवर्क कर रहा है या नहीं। वहीं अगर बच्चे फेल होते हैं तो शिक्षकों की भी जवाबदेही तय होगी और पढ़ाई की मॉनिटरिंग की जाएगी। -कृष्ण कुणाल, सचिव शिक्षा विभाग