
जयपुर। प्रदेश में फर्जी डिग्रियों के सहारे डॉक्टर बनने के दो मामले सामने आए हैं। राजस्थान एसओजी ने ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसकी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास है। उसने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज से मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया और अस्पताल तक खरीद लिया। दूसरे आरोपी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की, लेकिन विदेशी मेडिकल स्नातकों की परीक्षा में छह बार असफल होने के बाद बिहार के मेडिकल कॉलेज की फर्जी डिग्री और अंकतालिका बनवा ली। एसओजी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसओजी के अनुसार, ननजी राम चौधरी ने वर्ष 2010 के आसपास एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक पर मरीजों की पर्चियां काटने का काम शुरू किया था। इसके बाद उसने रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर भी काम किया। वर्ष 2014 में वह जालोर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र में स्थित राजदेव अस्पताल में ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने लगा। आरोप है कि इसी दौरान उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण करा लिया।
जांच के मुताबिक, वर्ष 2015 में उसने अस्पताल खरीद लिया और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर अस्पताल कर दिया। बताया गया है कि अस्पताल में 100 बेड तक की व्यवस्था की गई और स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित अन्य चिकित्सकों की टीम रखी गई। आरोपी पर खुद चिकित्सकीय कार्य करने और ऑपरेशन में शामिल होने के आरोप भी हैं। एसओजी अब अस्पताल में उसकी भूमिका और मरीजों के इलाज से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
एडीजी एसओजी विशाल बंसल के अनुसार, ननजी राम ने मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए दसवीं-बारहवीं की अंकतालिकाओं, एमबीबीएस डिग्री और स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान के डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। ये प्रमाणपत्र आंध्र प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी और मुंबई के कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स से संबंधित बताए गए हैं। जांच में डिप्लोमा के प्रमाणपत्र, आवंटन पत्र और परीक्षा से जुड़े कुछ दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इनके स्रोत और फर्जीवाड़े में मदद करने वालों की भूमिका की जांच जारी है। आरोपी ननजी राम रेल क्षेत्र गांव पोस्ट दहीपुर, तहसील रानीवाड़ा जिला जालोर का रहने वाला है।
दूसरा आरोपी पंकज यादव सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के कांवट का निवासी है। एसओजी के अनुसार, उसने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। इसके बाद उसने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) करीब छह बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका के साथ बिहार मेडिकल काउंसिल का कथित फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र तैयार कराया।
दस्तावेजों का बिहार मेडिकल काउंसिल, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय और श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज से सत्यापन कराया गया। जांच में कॉलेज में उसका पंजीकरण नहीं मिला और विश्वविद्यालय ने डिग्री व अंकतालिका को फर्जी बताया। एसओजी ने पंकज को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, वह गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां रह रहा था।
जयपुर के अशोक नगर थाने में 14 अक्टूबर को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधारी गोपाल की शिकायत पर फर्जी दस्तावेजों से पंजीकृत डॉक्टरों के संबंध में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में मामला एसओजी को सौंप दिया गया। मामले में सात अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। काउंसिल ने फर्जी पाए गए पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। अब जांच का दायरा उन लोगों तक भी बढ़ाया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर दस्तावेज तैयार कराने या पंजीकरण कराने में मदद की। तत्कालीन काउंसिल पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।