Rajasthan Exam Cheating: स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने सार्वजनिक परीक्षाओं में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने वाले 25 हजार रुपए के इनामी आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी डेढ़ साल से फरार था।
Rajasthan Exam Cheating Racket Busted: जयपुर: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की शुचिता भंग करने वाले भू-माफियाओं और नकल गिरोहों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसओजी ने पिछले डेढ़ साल से फरार चल रहे और 25 हजार रुपए के इनामी आरोपी राजेश कुमार रेवाड (39) को गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें कि आरोपी पर राजस्थान हाईकोर्ट और ईओ/आरओ भर्ती परीक्षाओं में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए बड़े स्तर पर नकल कराने का आरोप है। एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि चूरू जिले के रतनगढ़ (रूखासर) निवासी राजेश रेवाड पिछले 18 महीनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।
एसओजी की एक विशेष टीम उसकी तलाश में जुटी थी। तकनीकी विश्लेषण और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने घेराबंदी की और तीन अप्रैल को आरोपी को धर दबोचा। एडिशनल एसपी प्रकाश कुमार शर्मा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने नकल गिरोह की कमर तोड़ दी है।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। राजेश रेवाड अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि वह एक संगठित गिरोह का हिस्सा था। गिरोह का मास्टरमाइंड पौरव कालेर और उसका चाचा तुलछाराम कालेर सालासर से इस नेटवर्क को चला रहे थे। पौरव कालेर सालासर में बैठकर मोबाइल के जरिए परीक्षा केंद्र के भीतर मौजूद राजेश को ब्लूटूथ पर उत्तर लिखवाता था।
जयपुर के नेहरू ज्योति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 19 मार्च 2023 को आयोजित लिपिक ग्रेड-द्वितीय परीक्षा के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल कर कई अभ्यर्थियों को अवैध मदद पहुंचाई गई।
आरोपी राजेश केवल लिपिक भर्ती ही नहीं, बल्कि ईओ/आरओ भर्ती परीक्षा 2022 (14 मई 2023) में भी सक्रिय था। एसओजी की जांच में यह प्रमाणित हुआ कि कालेर गिरोह ने अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर उन्हें ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराए थे। इस व्यापक धोखाधड़ी और पेपर लीक के सबूत मिलने के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए ईओ/आरओ भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया था।
यह मामला पारिवारिक संलिप्तता का भी एक बड़ा उदाहरण बना। राजेश रेवाड की पत्नी बबीता रेवाड भी इसी गिरोह का हिस्सा थी। उसे एसओजी ने पिछले साल 19 अक्टूबर 2024 को ही गिरफ्तार कर लिया था। पति-पत्नी दोनों मिलकर अभ्यर्थियों को नकल की सामग्री और तकनीकी उपकरण मुहैया कराने का काम करते थे।
एसओजी अब राजेश रेवाड से पूछताछ कर रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़ी अन्य कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन अभ्यर्थियों की पहचान करना है, जिन्होंने लाखों रुपए देकर इस गिरोह से मदद ली थी। साथ ही आर्थिक लेन-देन के स्रोतों और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।