जयपुर

Rajasthan Farmers : राजस्थान के किसानों के लिए कमाई का बड़ा मौका, इस विदेश फ्रूट की खेती से हो जाएंगे मालामाल

Rajasthan Farmer : राजस्थान के किसानों को कमाई का बड़ा मौका मिला है। इस विदेश फ्रूट की खेती से राजस्थान के किसान मालामाल हो जाएंगे! जानें यह कौन सा फ्रूट है।
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Rajasthan farmers Earning big opportunity this exotic Passion fruit Cultivation will make rich
पैशन फ्रूट। फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Farmer : राजस्थान में पैशन फ्रूट की मांग अचानक बढ़ गई है। प्रदेश की जलवायु पैशन फ्रूट फसल के लिए बेहद अनुकूल है। यह कम लगात में अधिक मुनाफे की खेती है। पैशन फ्रूट की खेती से राजस्थान के किसान मालामाल होंगे। पैशन फ्रूट को कृष्ण फल, कृष्ण कमल, या पैसिफ्लोरा एडुलिस आदि नामों से पुकारते हैं।

पैशन फ्रूट बहुवर्षीय फल है। इसकी मांग होटल, जूस इंड़स्ट्री और आयुर्वेदिक उत्पादों में बढ़ रही है। इससे शरबत, जैम, जैली, आइसक्रीम बना सकते हैं। कहा जाता है कि यह विटामिन ए-सी व फाइबर से भरपूर है। यह कई रोगों में फायदेमंद माना जाता है। इसका फल का गूदा मोटा होता है। इसकी बैंगनी-पीली दो किस्में होती हैं।

मिट्टी व जलवायु

इसको उगाने के लिए गर्म-आर्द्र जलवायु बेहतर मानते हैं। खेती के लिए 20-30 डिग्री सेल्सियस तापमान ठीक रहता है। इसको कई प्रकार की मिट्टी में उगा सकते हैं, लेकिन जल निकासी वाली, कार्बनिक पदार्थों से पूर्ण रेतीली दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 6.0-7.5 हो उपयुक्त होती है।

खेती की तैयारी

पैशन फूट को बीज, कलमों और ग्राफ्टिंग से उगाया जाता है। बीज को 24 घंटे पानी में भिगोकर कर बोएं। रोपण योग्य पौध 30-40 दिन में तैयार हो जाते हैं। कलम से 3-4 गांठों वाली 30-35 सेमी आकार की कटिंग आदर्श होती है। पौधों का रोपण फरवरी-मार्च एवं जून-जुलाई आदर्श माना जाता है। बेल को 6-7 फीट ऊंचे खंभे पर तार या तारबंदी वाली जाली लगाकर ऊपर चढ़ा दें।

ये भी जरूरी है

पौधे लगाने के तुरंत बाद और मौसम अनुसार 7-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। देशी खाद से उपज बढ़ती है। प्रति वर्ष 80 ग्राम एन, 40 ग्राम पी और 50 ग्राम के प्रति पौधा डालें। उर्वरक कीटनाशकों के साथ न मिलाएं।

कीट और रोग प्रबंधन

मकड़ी, थ्रिप्स कलियों और विकसित हो रहे फलों को खाती हैं। प्रभावित फल विकृत हो जाते हैं। फलों का वजन-रस की मात्रा कम हो जाती है। मैलाथियान का छिड़काव करके नियंत्रित कर सकते हैं। भूरा धब्बा बीमारी में जड़ सड़न होती है। रोग के नियंत्रण के लिए प्रभावित शाखाओं को काटकर जला दें। मैंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर कि दर से छिड़कें।

200 रुपए प्रति किलो तक मिलता है दाम

पैशन फूट की लताएं बारहमासी होती हैं। ये 3-4 साल तक फल देती हैं। फूल आने के 70-85 दिन में फल पक जाते हैं। पक जाने के बाद फल गिर जाते हैं या रंग बदल लेते हैं। प्रति पौधा 10-15 किलो फल प्रति वर्ष प्राप्त होता है। 200 रुपए प्रति किलो तक दाम मिल जाते हैं।
सुनील कुमार खोईवाल, कृषि अधिकारी, चित्तौड़गढ़

Updated on:
26 Feb 2026 11:32 am
Published on:
26 Feb 2026 11:32 am