
राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलने वाली एक बेहद बड़ी खबर जयपुर सचिवालय से आई है। दरअसल, राजस्थान वित्त विभाग ने प्रदेश में वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक व्यय पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक विस्तृत और सख्त गाइडलाइन वाला परिपत्र जारी कर दिया है। इस नए आदेश का सीधा असर राजस्थान के मंत्रियों के रसूख, बड़े आईएएस-आईपीएस अफसरों की सुख-सुविधाओं और सरकारी दफ्तरों के रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ने वाला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद अपने काफिले (कारकेड) की गाड़ियों को कम करके जिस सादगी की मिसाल पेश की थी, अब उसे पूरे सिस्टम के लिए कानून बना दिया गया है।
मंत्रियों और आयोगों के अध्यक्षों के भारी-भरकम काफिले और सरकारी तेल के भी बेतहाशा खर्च सहित अन्य वीआईपी कल्चर पर वित्त विभाग ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है।
अत्यावश्यक न्यूनतम वाहन ही होंगे अनुमत: मुख्यमंत्री के फैसले की तर्ज पर अब राजस्थान के मंत्रियों, विभिन्न बोर्डों, निगमों, अकादमियों और आयोगों के पदाधिकारियों को जिन्हें आधिकारिक तौर पर कारकेड अनुमत है, उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने काफिले में केवल और केवल अत्यावश्यक न्यूनतम वाहनों का ही उपयोग करेंगे। फिजूल की गाड़ियों को तुरंत काफिले से हटाया जाएगा।
अफसरों के लिए कार पुलिंग का नियम: वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए आदेश दिया गया है कि अगर एक ही गंतव्य या एक ही बैठक की तरफ कई अधिकारी और कर्मचारी जा रहे हैं, तो वे अलग-अलग गाड़ियों में जाने के बजाय अपने शासकीय, संविदा या निजी वाहनों में कार पुलिंग को प्राथमिकता देंगे। सचिवालय में अब यह नियम कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
वित्त विभाग का यह नया आदेश राजस्थान को पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी की तरफ ले जाने वाला एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। सरकार अब अपने पूरे ट्रांसपोर्ट बेड़े का कायाकल्प करने जा रही है।
चरणबद्ध तरीके से बदले जाएंगे वाहन: राज्य सरकार के सभी पेट्रोल और डीजल से चलने वाले राजकीय वाहनों को अब चरणबद्ध रीके से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) में बदलने की जरूरी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
शहरी अफसरों के लिए EV अनिवार्य: प्रथम चरण में उन तमाम आला अधिकारियों को टारगेट किया गया है जिनका सामान्य कामकाज या रूटीन ड्यूटी शहर के भीतर (इंट्रा-सिटी) ही रहती है। अब इन अफसरों के लिए भविष्य में क्रय किए जाने वाले सभी नए वाहन केवल और केवल ई-व्हीकल ही होंगे।
संविदा वाहनों में प्राथमिकता: दफ्तरों में जो गाड़ियां संविदा या किराए पर ली जाती हैं, उनमें भी अब ई-व्हीकल के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समयबद्ध प्लान: प्रदेश में सरकारी भवनों और प्रमुख जगहों पर ई-व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए संबंधित विभागों को एक निश्चित और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए वर्तमान में जितने भी लंबित प्रस्ताव हैं, उन्हें नियमानुसार तत्काल अप्रूवल (अनुमोदन) दिया जाएगा।
सरकारी पैसों और जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से होने वाले फिजूलखर्चों को रोकने के लिए वित्त विभाग ने इस बार सबसे सख्त रुख अपनाया है।
| सरकारी गतिविधि (Activity) | पुराना वर्किंग स्टाइल (Past Practice) | वित्त विभाग का नया सख्त नियम (New Directive) | धरातल पर होने वाली सीधी बचत (Financial Impact) |
| राजकीय व्यय से विदेश यात्राएं | अध्ययन दौरों और सम्मेलनों के नाम पर अफसर और जनप्रनिधि अक्सर सरकारी खर्च पर विदेश जाते थे। | पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban); सरकारी खजाने से किसी भी प्रकार की विदेश यात्रा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। | विदेशी मुद्रा और दौरों पर होने वाले लाखों-करोड़ों रुपयों की सीधी बचत होगी। |
| सरकारी कार्यक्रम एवं समारोह | निजी फाइव स्टार होटलों, बड़े रिजॉर्ट्स और महंगे मैरिज गार्डनों में सरकारी बजट से भव्य सेमिनार होते थे। | राजकीय भवनों में ही होंगे आयोजन; वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 08.04.2026 की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित करनी होगी। | निजी होटलों को मिलने वाले भारी-भरकम टेंडर्स और जनता के पैसों की बर्बादी पूरी तरह रुकेगी। |
| विभागीय समीक्षा बैठकें | जिलों के कलेक्टरों और अधिकारियों को बार-बार जयपुर सचिवालय बुलाया जाता था, जिससे यात्रा भत्ता (TA/DA) बढ़ता था। | वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) को प्राथमिकता; सभी महत्वपूर्ण बैठकें और समीक्षाएं अब यथासंभव ऑनलाइन ही आयोजित की जाएंगी। | अधिकारियों का समय बचेगा और जिलों का प्रशासनिक काम बाधित नहीं होगा। |
सरकारी दफ्तरों में फाइलों के अंबार और कागजों की बर्बादी को रोकने के लिए डिजिटल टूल्स को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
ई-ऑफिस और ई-फाइल सिस्टम: विभिन्न सरकारी कार्यालयों के मध्य अब ई-ऑफिस और ई-फाइल का उपयोग शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा। भौतिक पत्राचार (कागजी चिट्ठियों) के स्थान पर अब राज-काज पोर्टल (Raj-Kaj Portal) के उपयोग को अनिवार्य प्राथमिकता दी जाएगी।
ऑनलाइन ट्रेनिंग और लर्निंग: कर्मचारियों और अधिकारियों के भौतिक रूप से होने वाले महंगे प्रशिक्षण कार्यक्रमों (Physical Training) के स्थान पर अब यथासंभव ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के मशहूर IGOT कर्मयोगी पोर्टल (iGOT Karmayogi Portal) का अधिकतम उपयोग करने की हिदायत दी गई है।
वित्त विभाग का यह परिपत्र केवल खर्चों में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को भी एक नया विजन दे रहा है।
सौर ऊर्जा और बिजली बचत का महा-संकल्प: ऊर्जा विभाग द्वारा अब घरेलू उपभोक्ताओं के विद्युत उपयोग और आत्मनिर्भरता को शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत डोमेस्टिक सोलर प्लांट्स की स्थापना को तेज किया जाएगा। साथ ही, राजस्थान के सभी राजकीय भवनों में बिजली के उपभोग को कम करने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। दफ्तरों में काम करने वाले स्टाफ को साफ कहा गया है कि कार्यालय समय के दौरान एसी, पंखे और लाइटों का उपयोग अत्यंत मितव्ययता से करें और ऑफिस टाइम खत्म होते ही सभी विद्युत उपकरणों को पूरी तरह बंद करना सुनिश्चित करें।
कृषि विभाग के लिए विशेष गाइडलाइंस: किसानों की भलाई और पर्यावरण के लिए कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे सूबे में Natural, Organic, and Sustainable Agriculture (प्राकृतिक और जैविक खेती) को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित करें।
यूरिया के दुरुपयोग पर सर्जिकल स्ट्राइक: गैर-कृषि कार्यों (जैसे फैक्ट्रियों या मिलावटखोरी) हेतु कृषि यूरिया के अवैध उपयोग को पूरी तरह न्यूनतम करने के लिए पूरे राजस्थान में एक बड़ा विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही Agri-Stack (एग्री-स्टैक) के पंजीयन को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि उर्वरकों के उपयोग को पूरी तरह से तर्कसंगत और औचित्यपूर्ण बनाया जा सके।
इस पूरे आदेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सिर्फ कागजी शेर बनाकर नहीं छोड़ा गया है। वित्त विभाग ने इसके क्रियान्वयन के लिए सीधे टॉप ब्यूरोक्रेसी को ज़िम्मेदारी दी है।
साफ शब्दों में आदेश दिया गया है कि व्यय नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन के इन सभी दिशा-निर्देशों की जमीनी स्तर पर कठोरता से अनुपालना सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित प्रशासनिक विभाग के प्रभारी सचिव (Administrative Secretary) और विभागाध्यक्ष सीधे तौर पर उत्तरदायी और जवाबदेह होंगे। अगर किसी भी विभाग में फिजूलखर्च या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो गाज सीधे विभाग के सबसे बड़े अधिकारी पर गिरेगी।