
जयपुर। राजस्थान के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के तहत 3 लाख घरों में मुफ्त सोलर रूफटॉप लगाने जा रही है। इस योजना का लाभ उन घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिनकी मासिक बिजली खपत 150 यूनिट तक है। सरकार का दावा है कि 1.1 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप लगने के बाद इन उपभोक्ताओं की मासिक जरूरत की बिजली का उत्पादन घर की छत पर ही हो जाएगा, जिससे उनका बिजली बिल शून्य तक पहुंच सकता है।
योजना को गति देने के लिए जयपुर डिस्कॉम सितंबर में नया 'यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन मॉडल' लॉन्च करेगा। इसके जरिए प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियां- जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम मिलकर 3 लाख घरों में सोलर रूफटॉप स्थापित करेंगी। अकेले जयपुर जिले में करीब 10 हजार बिजली उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ मिलेगा।
डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नए मॉडल का उद्देश्य पीएम सूर्य घर योजना का दायरा बढ़ाना और अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाना है। इसके तहत पात्र उपभोक्ताओं को सोलर रूफटॉप लगाने के लिए किसी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा। पूरी प्रक्रिया डिस्कॉम की निगरानी में होगी, जिससे गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
योजना के तहत प्रत्येक घर पर 1.1 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत करीब 60 हजार रुपए होगी। इसमें से 33 हजार रुपए की राशि पीएम सूर्य घर योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से दी जाएगी, जबकि शेष 27 हजार रुपए संबंधित डिस्कॉम वहन करेगा। यानी पात्र उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगाने के लिए अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से केवल उपभोक्ताओं को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि बिजली वितरण कंपनियों पर भी भार कम होगा। जिन घरों में हर महीने 150 यूनिट तक बिजली की खपत होती है, वहां जरूरत की अधिकांश बिजली सौर ऊर्जा से तैयार होगी। इससे पीक डिमांड के दौरान ग्रिड पर दबाव घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की योजना सितंबर के पहले सप्ताह से मुफ्त सोलर रूफटॉप लगाने का अभियान शुरू करने की है। तीनों डिस्कॉम क्षेत्रों में करीब तीन लाख सोलर रूफटॉप स्थापित करने पर लगभग 600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस मॉडल को वर्ष 2031 तक चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सके। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह योजना प्रदेश में सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ घरेलू बिजली खर्च कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।