केन्द्रीय उत्पाद, सीमा शुल्क एवं सेवाकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने तेल उत्खनन पर बकाया सेवा कर के मामले में केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग का फैसला रद्द कर उसे झटका दिया।
केन्द्रीय उत्पाद, सीमा शुल्क एवं सेवाकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने तेल उत्खनन पर बकाया सेवा कर के मामले में केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग का फैसला रद्द कर उसे झटका दिया। इससे राज्य के पेट्रोलियम विभाग को करीब 6315 करोड़ रुपए की राहत मिल गई।
जोधपुर स्थित सीजीएसटी आयुक्त ने एक अप्रेल 2013 से 31 मार्च 2016 तक की अवधि के लिए जैसलमेर व बाड़मेर में लीज पर कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के उत्खनन के मामले में यह फैसला दिया। इसमें रॉयल्टी-डेडरेंट को अचल सम्पत्ति का किराया मानकर 1657.71 करोड रुपए सेवा कर तथा 1657.71 करोड रूपए पेनल्टी की मांग की गई। बकाया राशि पर वर्ष 2019 में निर्णय होने के समय से ब्याज देने को भी कहा गया।
केन्द्रीय आयुक्त के निर्णय को राज्य सरकार की ओर से पेट्रोलियम निदेशक ने वर्ष 2019 में केन्द्रीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी। न्यायाधिकरण ने सीजीएसटी जोधपुर का फैसला रद्द कर दिया। केन्द्रीय न्यायाधिकरण से राहत नहीं मिलने पर राज्य सरकार को सेवा कर व पेनल्टी के अलावा करीब 3000 करोड़ रुपए ब्याज देना पड़ता।
पेट्रोलियम विभाग की ओर से अधिवक्ता व सीए रितुल पटवा ने न्यायाधिकरण को बताया कि खनन अधिकार सहायक सेवा नहीं है। खनन को 31 मार्च 2016 तक सेवा कर से छूट प्राप्त थी। इसके बाद का ही टैक्स वसूल किया जा सकता है।
पेट्रोलियम विभाग ने इस मामले में प्रभावी रूप से पैरवी की। इससे सेवा कर के मामले में राज्य को लगभग 6315 करोड़ रुपए से अधिक की राहत मिली है।
-टी रविकांत, प्रमुख सचिव, खान एवं पेट्रोलियम