राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी भर्ती में शून्य नंबर पाने वाले को सरकारी नौकरी देने के मामले पर हाईकोर्ट सख्त है। कोर्ट ने सरकार को एक और मौका दिया है। साथ ही सख्त कदम उठाने की बात कही है.
जयपुर। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में शून्य अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी के चयन को लेकर दायर याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक और अवसर देते हुए 7 अप्रेल तक शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा तक संबंधित विभाग अपना पक्ष शपथ पत्र के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो कोर्ट इस मामले में सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकलपीठ ने सोमवार को विनोद कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले पर आश्चर्य जताते हुए सरकार से सवाल किया था कि जब कोई अभ्यर्थी परीक्षा में शून्य अंक प्राप्त करता है, तो उसे किसी पद के लिए योग्य कैसे माना जा सकता है। अदालत ने इस संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा था।
सुनवाई के दौरान प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विभाग का कार्य केवल चयनित अभ्यर्थियों को विभिन्न विभागों में आवंटित करना है। भर्ती के नियम तय करना और न्यूनतम योग्यता निर्धारित करना कार्मिक विभाग तथा कर्मचारी चयन बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है। विभाग ने यह भी कहा कि अदालत के आदेश की जानकारी संबंधित विभागों को दे दी गई है और उनसे इस मामले में आवश्यक जानकारी मांगी गई है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से संबंधित विभाग से शपथ पत्र मांगा था, लेकिन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों की स्पष्टता आवश्यक है।
कोर्ट ने अंत में निर्देश दिया कि कार्मिक विभाग और कर्मचारी चयन बोर्ड 7 अप्रेल तक इस मामले में अपना विस्तृत शपथ पत्र पेश करें, ताकि अदालत इस पर आगे की सुनवाई कर सके।