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Rajasthan: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, शून्य अंक पर चयन, माइनस अंक वाला भी दावेदार

Fourth Class Employee Recruitment: जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट में एक ऐसा मामला पहुंचा, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में शून्य अंक वाले अभ्यर्थी का चयन हो गया और ऋणात्मक अंक वाले अभ्यर्थी ने नियुक्ति दिलाने की गुहार की है। कोर्ट ने इस स्थिति पर हैरानी जताते हुए कहा कि या तो परीक्षा को इस स्तर की नौकरी के लिए अनावश्यक रूप से कठिन बनाया गया या फिर भर्ती प्रक्रिया में उचित मानक निर्धारित नहीं किए।
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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 9 Mar 2026, 6:52 AM IST

चतुर्थ श्रेणी भर्ती मामले में याचिका पर आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई, पत्रिका फाइल फोटो

चतुर्थ श्रेणी भर्ती मामले में याचिका पर आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई, पत्रिका फाइल फोटो

Fourth Class Employee Recruitment: जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट में एक ऐसा मामला पहुंचा, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में शून्य अंक वाले अभ्यर्थी का चयन हो गया और ऋणात्मक अंक वाले अभ्यर्थी ने नियुक्ति दिलाने की गुहार की है।
कोर्ट ने इस स्थिति पर हैरानी जताते हुए कहा कि या तो परीक्षा को इस स्तर की नौकरी के लिए अनावश्यक रूप से कठिन बनाया गया या फिर भर्ती प्रक्रिया में उचित मानक निर्धारित नहीं किए। दोनों ही परिस्थितियां स्वीकार्य नहीं हैं। कार्मिक जिम्मेदारियों को संतोषजनक ढंग से पूरी कर सकें, इसके लिए सरकारी भर्तियों में न्यूनतम मानक निर्धारित करना आवश्यक है।

याचिका पर आज फिर सुनवाई

न्यायाधीश आनंद शर्मा ने विनोद कुमार की याचिका पर सुनवाई की। इस मामले पर सोमवार को फिर सुनवाई होगी। अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने कोर्ट को बताया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में आरक्षित वर्ग की कट ऑफ 0.0033 अंक रही, लेकिन याचिकाकर्ता के ऋणात्मक अंक आने के कारण उसे चयन से वंचित कर दिया। हालांकि राज्य सरकार ने भर्ती के लिए कोई न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं किए है।

न्यूनतम योग्यता मानक तय करें

कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि लगभग शून्य या नकारात्मक अंक पाने वाले अभ्यर्थी को किसी भी जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आरक्षित वर्गों के लिए भी न्यूनतम योग्यता मानक तय करे ताकि चयनित उम्मीदवार बुनियादी कार्य करने में सक्षम हों।

कोर्ट ने कहा कि सरकार न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित न करने के पीछे कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी नहीं बता पाई। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर से कहा कि संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव का हलफनामा पेश किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि न्यूनतम अंक निर्धारित क्यों नहीं किए गए, इस गंभीर चूक के पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसी 'आपत्तिजनक स्थिति' से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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