जलदाय मंत्री सुरेंद्र गोयल ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में सचल प्रयोगाशालाएं स्थापित करने की घोषणा की है।
जयपुर। जलदाय मंत्री सुरेंद्र गोयल ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में सचल प्रयोगाशालाएं स्थापित करने की घोषणा की है। गोयल ने कहा है कि 20 जिलों में इस तरह की प्रयोगशालाओं की स्थापना के कार्यादेश दे दिए गए हैं। जलदाय विभाग की अनुदान मांगों का जवाब देते हुए गोयल ने शुक्रवार को कहा कि इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश की हर विधानसभा में 100 हैंडपंप और प्रदेश में 500 नए आरओ प्लांट लगाए जाएंगे। कंटीजेंसी प्लान के तहत चीफ इंजीनियर और एडिशनल चीफ इंजीनियर को 50 लाख रुपए की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति के अधिकार दिए हैं। साथ ही 1800 सौर उर्जा आधारित फ्लोरीडेशन की स्थापना अक्टूबर से पहले की जाएगी।
राज्य में 25 ब्लॉक ही सुरक्षित
जलदाय मंत्री ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के चलते राज्य में भूजल का स्तर नीचे गिर रहा है। यहां 295 ब्लॉक में से 195 ब्लॉक तो सूख चुके हैं और 10 ब्लॉक क्रिटिकल स्थिति में हैं। इसके साथ ही अब सिर्फ 25 ब्लॉक ही सेफ स्थिति में बचे हैं। पेयजल योजनाओं के लिए नदियों को जोड़कर पानी लाने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस सरकार से बेहतर कार्य
गोयल ने बताया कि राज्य सरकार ने गत कांग्रेस शासन की तुलना में बेहतर कार्य किया है। कांग्रेस के 5 वर्ष में जहां 21 परियोजनाएं पूरी की गई वहीं भाजपा सरकार ने चार साल में 36 प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। कांग्रेस शासन में जहां 40 लाख लोगों तक पानी पहुंचाया गया।
अधिकारी—कर्मचारी की पीठ थपथपाई
उन्होंने राज्य में बेहतर जल प्रबन्धन के लिए सदन में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि तकनीकी कर्मचारियों की मेहनत के कारण राज्य में गत चार सालों में कहीं पानी के लिए आंदोलन नहीं हुआ।
पानी की उपलब्धता से होगा किसानों का भला
विधानसभा में शुक्रवार को अनुदान मांग के जवाब में सिंचाई मंत्री रामप्रताप ने कहा कि किसानों का भला साड़ी बांटने या ऋण माफी से नहीं बल्कि पानी की उपलब्धता से होगा। यह पानी ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट से मिलेगा। इससे 13 जिले लाभान्वित होंगे और डीएमआईसी का क्षेत्र भी कवर होगा। यहां के उद्योगों को भी पानी मिल सकेगा।
विपक्ष की ओर से उठाए गए इंटर स्टेट विवाद मुद्द पर उन्होंने कहा कि गुजरात हमारा हिस्सा देने के लिए तैयार हो गया है। यमुना के मामले में गत सरकार ने वर्ष 2002 में एमओयू तैयार किया था, जो आज तक बिना हस्ताक्षर के पड़ा है। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में हमारा हिस्सा मिलना तय हो गया है। यह पानी पाइप लाइन के माध्यम से लाया जाएगा।