
जयपुर। राजस्थान सरकार ने सम्पत्ति को लेकर विवाद में आए उद्योग, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) एवं राजकीय उपक्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को प्रशासनिक कारणों से आगामी आदेशो तक पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में (एपीओ) रखा है। वे इस पद पर आने से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे थे। मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से हटाए जाने के समय भी राज्य सरकार ने चौंकाने वाला निर्णय किया था।
राज्य सरकार ने अग्रवाल के मामले में एक बार फिर आश्चर्यजनक निर्णय किया है। अग्रवाल वर्तमान में उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) एवं राजकीय उपक्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं भिवाड़ी इन्टीग्रेटेड विकास प्राधिकरण के विशेषाधिकारी पद पर कार्यरत हैं, उनके पदनाम में विनियोजन. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी कार्य विभाग (डोरा) एवं निवेश संवर्धन ब्यूरो के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा रीको के अध्यक्ष तथा राजसिको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी शामिल है।
अग्रवाल इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। इसी बीच उनकी पत्नी आइपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर व अन्य परिजन और रिश्तेदारों के 20 विला की खरीद का मामला सुर्खियों में आया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश में उनको एपीओ किए जाने के पीछे प्रशासनिक कारण बताए गए हैं।
बता दें कि प्रमुख सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों में संपत्ति के मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल 11.56 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ सबसे ऊपर है, जबकि मुख्य सचिव वी श्रीनिवास 10.30 लाख की संपत्ति के साथ इस सूची में सबसे नीचे है। केंद्र सरकार ने हाल ही देशभर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की 31 दिसंबर 2025 तक की अचल संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया था, जिसमें राजस्थान के 281 अधिकारी शामिल है।
शिखर अग्रवाल: (1993 बैच, एसीएस)
संपतिः उदयपुर, जयपुर, अलवर में पद फार्म हाउस, होटल व रिसॉर्ट में 14 यूनिट
वर्तमान मूल्यः 11.56 करोड़
संपति से वार्षिक आय: 88 लाख (होटल/ रिसॉर्ट व दुकानों से)
संयुक्त स्वामित्यः पत्नी प्रशाखा