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ग्राउंड रिपोर्ट: अरावली पर संकट के बीच खनन से सरकार को रोज 16 करोड़ की कमाई, 6 हजार से अधिक खदानें हो रहीं खोखली

Aravalli Hills: अरावली पर्वत को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। वहीं, अरावली पॉलीगॉन क्षेत्र में 6,838 खदानें सक्रिय हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इनसे सरकार को 5,875.72 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। यानी रोजाना करीब 16 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 30 Oct 2026, 9:40 AM IST

daily earnings of 16 crore from aravalli mountains

अरावली पर्वत में सबसे ज्यादा खनन उदयपुर-राजसमंद और सिरोही बेल्ट में (पत्रिका फोटो)

Aravalli Hills Mining: जयपुर: अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, इधर उसी अरावली की छाती पर 6,838 खदानें दिन-रात चल रही हैं। खनन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एफएसआई की ओर से चिन्हित अरावली पॉलीगॉन क्षेत्र में कुल 9,438 खनन पट्टे (एमएल और क्यूएल) इस समय प्रभावी हैं। इनमें से 6,838 खदानें चालू हैं, 2,186 बंद पड़ी हैं और 414 ऐसी हैं, जिनका आवंटन हो गया, लेकिन आज तक खनन शुरू ही नहीं हो पाया। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा राजस्व का है। सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में अरावली की इन खदानों से सरकार ने 5,875.72 करोड़ रुपए का राजस्व वसूला है। यानी औसतन हर दिन 16 करोड़ रुपए अरावली को खोदकर कमाए जा रहे हैं।

विभाग की ओर से विधानसभा में एक सवाल के जवाब में भेजी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली हिल्स और अरावली रेंज की नई परिभाषा तय की थी, जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को पहाड़ नहीं माना गया था। हालांकि, 29 दिसंबर 2025 को स्वतः संज्ञान याचिका पर उसी आदेश पर रोक लगा दी गई। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए राज्य स्तर पर अरावली की नई परिभाषा को लेकर कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है।

इसी बीच, पुराने आदेश 9 मई 2024 के आधार पर नीलामी जारी है और एफएसआइ की 25 अगस्त 2010 की रिपोर्ट में तय पॉलीगॉन के भीतर पूर्व अनुमति के साथ खनन चल रहा है। आंकड़े बताते हैं कि अरावली का कितना हिस्सा पहले ही खनन की चपेट में आ चुका है। कुल 9,438 में से 72.45 फीसदी खदानें सक्रिय हैं। करीब 23 फीसदी बंद हैं, जिनके बंद होने के प्रमुख कारणों में पर्यावरण स्वीकृति और कोर्ट के आदेश शामिल हैं।

सबसे ज्यादा दोहन उदयपुर-राजसमंद-सिरोही बेल्ट में

सबसे ज्यादा कमाई मार्बल और ग्रेनाइट बेल्ट से हो रही है। अरावली को बचाने की कोशिशों के बीच पहाड़ों की नीलामी से सरकारी खजाना भर रहा है। 6,838 खदानों में ब्लास्टिंग और डंपर चल रहे हैं, जबकि 100 मीटर की परिभाषा पर कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। अरावली की परिभाषा तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय कमेटी कुछ समय पहले प्रदेश के अरावली वाले जिलों का दो बार दौरा कर चुकी है। अब जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।

अरावली पॉलीगॉन के 20 जिलों में खदानों की स्थिति

खदानों का प्रकारसंख्या
कुल खानें9,438
चालू खानें6,838
बंद खानें2,186
शुरू नहीं हुईं414

अन्य प्रमुख आंकड़े

विवरणआंकड़ा
अरावली से गत वित्तीय वर्ष में मिला राजस्व₹5,875.72 करोड़
खदानें सक्रिय हैं72.45%