
अरावली पर्वत में सबसे ज्यादा खनन उदयपुर-राजसमंद और सिरोही बेल्ट में (पत्रिका फोटो)
Aravalli Hills Mining: जयपुर: अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, इधर उसी अरावली की छाती पर 6,838 खदानें दिन-रात चल रही हैं। खनन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एफएसआई की ओर से चिन्हित अरावली पॉलीगॉन क्षेत्र में कुल 9,438 खनन पट्टे (एमएल और क्यूएल) इस समय प्रभावी हैं। इनमें से 6,838 खदानें चालू हैं, 2,186 बंद पड़ी हैं और 414 ऐसी हैं, जिनका आवंटन हो गया, लेकिन आज तक खनन शुरू ही नहीं हो पाया। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा राजस्व का है। सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में अरावली की इन खदानों से सरकार ने 5,875.72 करोड़ रुपए का राजस्व वसूला है। यानी औसतन हर दिन 16 करोड़ रुपए अरावली को खोदकर कमाए जा रहे हैं।
विभाग की ओर से विधानसभा में एक सवाल के जवाब में भेजी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली हिल्स और अरावली रेंज की नई परिभाषा तय की थी, जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को पहाड़ नहीं माना गया था। हालांकि, 29 दिसंबर 2025 को स्वतः संज्ञान याचिका पर उसी आदेश पर रोक लगा दी गई। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए राज्य स्तर पर अरावली की नई परिभाषा को लेकर कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी बीच, पुराने आदेश 9 मई 2024 के आधार पर नीलामी जारी है और एफएसआइ की 25 अगस्त 2010 की रिपोर्ट में तय पॉलीगॉन के भीतर पूर्व अनुमति के साथ खनन चल रहा है। आंकड़े बताते हैं कि अरावली का कितना हिस्सा पहले ही खनन की चपेट में आ चुका है। कुल 9,438 में से 72.45 फीसदी खदानें सक्रिय हैं। करीब 23 फीसदी बंद हैं, जिनके बंद होने के प्रमुख कारणों में पर्यावरण स्वीकृति और कोर्ट के आदेश शामिल हैं।
सबसे ज्यादा कमाई मार्बल और ग्रेनाइट बेल्ट से हो रही है। अरावली को बचाने की कोशिशों के बीच पहाड़ों की नीलामी से सरकारी खजाना भर रहा है। 6,838 खदानों में ब्लास्टिंग और डंपर चल रहे हैं, जबकि 100 मीटर की परिभाषा पर कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। अरावली की परिभाषा तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय कमेटी कुछ समय पहले प्रदेश के अरावली वाले जिलों का दो बार दौरा कर चुकी है। अब जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।
| खदानों का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| कुल खानें | 9,438 |
| चालू खानें | 6,838 |
| बंद खानें | 2,186 |
| शुरू नहीं हुईं | 414 |
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| अरावली से गत वित्तीय वर्ष में मिला राजस्व | ₹5,875.72 करोड़ |
| खदानें सक्रिय हैं | 72.45% |
Updated on:
30 Oct 2026, 9:40 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 9:40 AM IST
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