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राजस्थान: IAS शिखर अग्रवाल पर बड़ी अपडेट, CBI जांच की मांग; सवा 6 करोड़ में खरीदे विला की कीमत 50 करोड़ पार

आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर के परिवारों द्वारा ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला खरीदने के मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। 'पब्लिक अगेंस्ट करप्शन' ने सीबीआई निदेशक को पत्र लिखकर संपत्तियों और विला की कम कीमतों की जांच की मांग की है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 30 Oct 2026, 10:20 AM IST

ias shikhar agarwal and prashakha mathur

आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर (पत्रिका फाइल फोटो)

जयपुर: आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर के परिवारों की ओर से ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला खरीदने के मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन ने सीबीआई निदेशक को शिकायत भेजकर भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और विला की कीमतों की जांच की मांग की है। संगठन की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने शिकायत भेजी है। शिकायत में कहा गया है कि प्रदेश में जमीनों और संपत्तियों के भाव आसमान छू रहे हैं, जबकि सरकार को इन अधिकारियों के विला 15-15 लाख रुपए में खरीदने की जानकारी दी गई है। संगठन ने सवाल उठाया कि आम आदमी को इस कीमत में एक कमरे का फ्लैट भी नहीं मिलता, जबकि कंपनी ने अधिकारियों को विला दिए।

दोनों अधिकारियों के बेटों और विला खरीदने वाले अन्य परिजनों के कारोबार की जांच की मांग भी की गई है। इसके अलावा, वन एवं पर्यावरण सचिव रहते हुए गोयल फैशंस कंपनी को वन भूमि के संबंध में लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की मांग की गई है। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन इससे पहले जल जीवन मिशन में पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों से जुड़े कथित घोटाले और आईएएस अखिल अरोड़ा सहित अन्य से जुड़े आईटी उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले भी उठा चुका है। इन मामलों में संगठन ने कोर्ट में भी दस्तक दी थी।

सवा छह करोड़ में खरीदे विला, बाजार भाव 50 करोड़ पार…कीमतों का गणित चर्चा में

वरिष्ठ आईएएस शिखर अग्रवाल के परिवार के लिए उदयपुर और अलवर में करीब 40 विला-कॉटेज खरीदने का मामला उनके एपीओ होने के बाद ब्यूरोक्रेसी से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा में है। रजिस्ट्री के अनुसार, करीब सवा छह करोड़ रुपए में हुई खरीद और इन संपत्तियों की बताई जा रही 50 करोड़ रुपए से अधिक की मौजूदा बाजार कीमत के बीच बड़ा अंतर सवाल खड़े कर रहा है।

चर्चा इसलिए भी है कि खरीद के बाद इन्हीं संपत्तियों को संबंधित कंपनी को कुल खरीद मूल्य की करीब 30 फीसदी राशि पर सालाना लीज पर देने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर भी लोग इन संपत्तियों की कीमतों का आकलन कर रहे हैं। विपक्ष ने मामले की जांच की मांग की है, जबकि सरकार की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पहली बार एपीओ, पहले भी रहे चर्चा में

1993 बैच के आईएएस शिखर अग्रवाल 33 साल की सेवा में पहली बार एपीओ हुए हैं। अभी उद्योग, निवेश और रीको जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी रहे हैं। उनके मुख्यमंत्री कार्यालय में रहने के दौरान तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत के साथ तनातनी की खबरें आई थीं।

माना जाता है कि इसी घटनाक्रम के बाद अग्रवाल की मुख्यमंत्री कार्यालय से और पंत की राजस्थान से विदाई हुई। इससे पहले 2016 में जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त रहते हुए राजमहल पैलेस होटल पर कार्रवाई को लेकर भी अग्रवाल चर्चा में रहे थे।

14 से 16.50 लाख में विला, बाजार भाव से कीमतों का बड़ा अंतर

सचिवालय से लेकर सियासी गलियारों तक सवाल है कि क्या 14 से 16.50 लाख रुपए में एक विला मिल सकता है? बताया जा रहा है कि उदयपुर के बुझड़ा में करीब तीन साल पहले और अलवर के अजबगढ़ में कुछ माह पहले खरीद हुई। संपत्तियां शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर, पुत्र और अन्य परिजनों के नाम खरीदी गई बताई जा रही हैं।

रजिस्ट्री के हिसाब से सभी करीब 40 विला-कॉटेज की कीमत सवा छह करोड़ रुपए के आसपास है। वहीं, प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार, अजबगढ़ में विला की मौजूदा कीमत आकार के हिसाब से 70 लाख से एक करोड़ रुपए और उदयपुर के बुझड़ा में 1.50 से 2 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है। इस आकलन के आधार पर कुल बाजार कीमत 50 करोड़ रुपए से अधिक बैठती है।

खरीद के बाद उसी कंपनी को लीज

करीब सवा छह करोड़ रुपए में जिस कंपनी से विला-कॉटेज खरीदे गए, उसी कंपनी को खरीद मूल्य के करीब 30 फीसदी के बराबर सालाना लीज राशि पर वापस दे दिए गए। आरोप यह भी हैं कि खरीद के आसपास रिसॉर्ट संचालित करने वाली कंपनी को सरकारी निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के तहत रियायतें मिलीं। इन संपत्तियों की खरीद, लीज और कंपनी को मिली रियायतों के बीच संबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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