
जयपुर: कर्नाटक सरकार ने जनस्वास्थ्य को आधार बनाते हुए गुटखा, तंबाकू-युक्त पान मसाला और निकोटिन वाले अन्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी है। 10 अगस्त से लागू आदेश में सप्लाई चेन के हर स्तर को प्रतिबंध के दायरे में लिया गया है। कर्नाटक के इस फैसले ने राजस्थान में वर्षों से लागू गुटखा प्रतिबंध की हकीकत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य में तंबाकू मिश्रित उत्पादों पर रोक के बावजूद यह अब गली-मोहल्ले की दुकानों का कारोबार नहीं रहकर एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुका है। तंबाकू उत्पाद निर्माण की 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। करीब 6 हजार से अधिक लोग इनमें काम कर रहे है। यानी जिस तंबाकू को स्वास्थ्य विभाग नशे के खिलाफ अभियान चलाकर रोकने की कोशिश कर रहा है, उससे जुड़ा औद्योगिक उत्पादन हजारों करोड़ रुपए का है।
प्रदेश में रोक के बावजूद अलग-अलग पाउच में तंबाकू और पान मसाला उपलब्ध होने से उपभोक्ता इन्हें मिलाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में केवल गुटखे के तैयार पाउच की जांच से समस्या खत्म नहीं हो पा रही। सूत्रों के अनुसार, राज्य में पान मसाला-जर्दा इकाइयों से जुड़ी कथित जीएसटी चोरी भी करीब 1000 करोड़ तक होने का अनुमान है। जयपुर तंबाकू उत्पादों के थोक वितरण और बड़े बाजार का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा अलवर, कोटा-नागौर सहित अन्य कुछ जिलों में पान मसाला-जर्दा से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं।
युवाओं को आकर्षित करने के लिए तंबाकू उत्पादों को कई बार फैशन और आधुनिक जीवनशैली से जोड़कर पेश किया जाता है। तंबाकू नियंत्रण कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन व थूकने पर रोक, स्कूल स्तर पर जागरूकता और विज्ञापन पर सख्ती जरूरी है।
-डॉ. पवन सिंघल, वरिष्ठ आचार्य, कान-नाक-गला विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज