High Court Stays JDA Expansion: जयपुर के 539 गांवों में निर्माण कार्य की गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों पर हाईकोर्ट की दखल के बाद ग्रामीणों में राहत और खुशी का माहौल है।
जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने पिछले साल जयपुर रीजन में जिन 679 गांवों को शामिल किया था, उनमें से 539 गांवों में निर्माण कार्य की गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों पर हाईकोर्ट की दखल के बाद ग्रामीणों में राहत और खुशी का माहौल है। वहीं कई ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने इसे आमजन की हित में बताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही जेडीए में शामिल क्षेत्रों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, ऐसे में नए गांवों को जोड़ना लोगों के हित में नहीं है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कोर्ट की दखल पर खुशी जाते हुए सरकार से क्षेत्र में निर्माण पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विकास योजनाएं पारदर्शी प्रक्रिया से ही लागू हों और पर्यावरणीय मानकों व ग्रामीणों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
होः जेडीए दायरा बढ़ने से बस्सी, शाहपुरा और चौमूं क्षेत्र के कई गांवों में भूमाफिया सक्रिय है। कई जगह बिना भू-रूपांतरण कराए ही कॉलोनियां बसाई जा रही हैं और कई जगह प्लॉट काटकर बेचे भी जा चुके है। जानकारों के अनुसार कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए धारा 90ए के तहत प्रक्रिया जरूरी है, जिसमें भूमि का रूपांतरण, ल-आउट पास और सुविधाओं का प्रावधान शामिल होता है। लेकिन नियमों की अनदेखी कर अवैध कॉलोनियां तेजी से फैल रही है। लोग अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग कर रहे है।
तूंगा सरपंच संघ के अध्यक्ष एवं अणतपुरा पंचायत प्रशासक शिवचरण गुर्जर ने कहा कि राजस्थान पत्रिका को साधुवाद है। जो जनहित के अभियान चलाया। अब हाईकोर्ट ने दखल देते हुए जयपुर सीमा विस्तार पर रोक का आदेश देकर ग्राम पंचायतों के अस्तित्व को बचाने का कार्य किया है।
चीथवाड़ी ग्राम पंचायत प्रशासक चौथमल जाट ने बताया कि विस्तार में पहले मास्टर प्लान जरूरी होने के साथ ही ग्रामीणों की भागीदारी और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर ही आगे कदम उठाए जाने चाहिए थे। क्षेत्र में जो अवैध निर्माण हो रहे हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
शाहपुरा नगरपरिषद के निवर्तमान सभापति बंशीधर सैनी का कहना है कि जेडीए में शामिल किए गए नगरपरिषद क्षेत्र व ग्राम पंचायतों को सीमा से बाहर रखा जाना चाहिए। ताकि गांवों व छोटे शहरों को विकास हो सकेगा। विकास योजनाएं पारदर्शी प्रक्रिया से ही लागू होनी चाहिए।
राजस्थान पत्रिका ने 27 फरवरी को सुनहरे सपने, कड़वी हकीकतः पुराने क्षेत्र में विकास अधूरे, नए में बिगड़ते हालात', 28 फरवरी को 'भूमाफिया का खेल तेज, गांव-कस्बों में खेतों पर बस रही अवैध कॉलोनियां' और 1 मार्च को 'पानी के रास्ते प्लाटिंगः बहाव क्षेत्र में बस रही कॉलोनियां,खरीदारों पर खतरा' शीर्षक से खबरें छापीं। इनमें जेडीए की नाकामी और माफिया की साजिश उजागर हुई। पत्रिका की खबरों पर 11 मार्च को चौमूं विधायक डॉक्टर शिखा मिल बराला ने भी विधानसभा में अवैध रूप से बसाई जा रही कॉलोनियों का मुद्दा उठाया था।